TPA धारा 56: पाश्चिक क्रेता द्वारा क्रमबन्धन
संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882 · अध्याय 3: स्थावर संपत्ति का विक्रय
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56. पाश्चिक क्रेता द्वारा क्रमबन्धन -
यदि दो या अधिक सम्पत्तियों का स्वामी उन्हें एक व्यक्ति के पास बंधक रख देता है और फिर उन सम्पत्तियों में से एक या अधिक को किसी दूसरे व्यक्ति को बेच देता है तो तत्प्रतिकूल संविदा के अभाव में क्रेता उक्त बंधक ऋण को उसे न बेची गई सम्पत्ति या सम्पत्तियों से, जहाँ तक कि उससे या उनसे उसकी तुष्टि हो सकती है, तुष्टि कराने का हकदार है किन्तु इस प्रकार नहीं कि उससे बन्धकदार के या उससे व्युत्पन्न अधिकाराधीन दावा करने वाले व्यक्तियों के या उक्त सम्पत्तियों में से किसी में प्रतिफलार्थ हित अर्जित करने वाले किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।
विक्रय पर विल्लंगमों का उन्मोचन
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