HSA धारा 14: हिन्दू नारी की सम्पत्ति उसकी आत्यंतिकतः अपनी सम्पत्ति होगी

हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 · अध्याय 2: निर्वसीयती उत्तराधिकार

अन्य भाषाओं में भी: English

14. हिन्दू नारी की सम्पत्ति उसकी आत्यंतिकतः अपनी सम्पत्ति होगी—(1) हिन्दू नारी के कब्जे में की कोई भी सम्पत्ति, चाहे वह इस अधिनियम के प्रारम्भ से पूर्व या पश्चात् अर्जित की गई हो, उसके द्वारा पूर्ण स्वामी के तौर पर न कि परिसीमित स्वामी के तौर पर धारित की जाएगी ।

स्पष्टीकरण—इस उपधारा में “सम्पत्ति” के अंतर्गत वह जंगम और स्थावर सम्पत्ति आती है जो हिन्दू नारी ने विरासत द्वारा अथवा वसीयत द्वारा अथवा विभाजन में अथवा भरण-पोषण के या भरण-पोषण की बकाया के बदले में अथवा अपने विवाह के पूर्व या विवाह के समय या पश्चात् दान द्वारा किसी व्यक्ति से, चाहे वह सम्बन्धी हो या न हो, अथवा अपने कौशल या परिश्रम द्वारा अथवा क्रय द्वारा अथवा चिरभोग द्वारा अथवा किसी अन्य रीति से, चाहे वह कैसी ही क्यों न हो, अर्जित की हो और ऐसी सम्पत्ति भी जो इस अधिनियम के प्रारम्भ से अव्यवहित पूर्व स्त्रीधन के रूप में उसके द्वारा धारित थी ।

(2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट कोई बात ऐसी किसी सम्पत्ति को लागू न होगी जो दान अथवा विल द्वारा या अन्य किसी लिखत के अधीन सिविल न्यायालय की डिक्री या आदेश के अधीन या पंचाट के अधीन अर्जित की गई हो यदि दान, विल या अन्य लिखत अथवा डिग्री, आदेश या पंचाट के निबन्धन ऐसी सम्पत्ति में निर्बन्धित सम्पदा विहित करते हों ।

अध्ययन: व्याख्या और संबंधित सामग्री

केवल संदर्भ के लिए; कानूनी सलाह नहीं। आधिकारिक स्रोत (PDF) →

इस अध्याय की अन्य धाराएँ