BSA धारा 134: विधि सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाएं
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · अध्याय 9: साक्षियों के विषय में
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134. कोई भी व्यक्ति किसी गोपनीय संसूचना को, जो उसके और उसके विधि सलाहकार के बीच हुई है, न्यायालय को प्रकट करने के लिए विवश नहीं किया जाएगा, जब तक कि वह अपने को साक्षी के तौर पर पेश न कर दे; ऐसे पेश करने की दशा में किन्हीं भी ऐसी संसूचनाओं को, जिन्हें उस किसी साक्ष्य को स्पष्ट करने के लिए जानना, जो उसने दिया है, न्यायालय को आवश्यक प्रतीत हो, प्रकट करने के लिए विवश किया जा सकेगा किन्तु किन्हीं भी अन्य संसूचनाओं को नहीं ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 124. कौन साक्ष्य दे सकेगा
- 125. साक्षी का मौखिक रूप से संसूचित करने में असमर्थ होना
- 126. कतिपय मामलों में पति और पत्नी की साक्षी के रूप में सक्षमता
- 127. न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट
- 128. विवाहित स्थिति के दौरान में की गई संसूचनाएं
- 129. राज्य के कार्यकलापों के बारे में साक्ष्य
- 130. शासकीय संसूचनाएं
- 131. अपराधों के करने के बारे में जानकारी
- 132. वृत्तिक संसूचनाएं
- 133. साक्ष्य देने के लिए स्वयंमेव उद्यत होने से विशेषाधिकार अभित्यक्त नहीं हो जाता
- 135. जो साक्षी पक्षकार नहीं है उसके हक विलेखों का पेश किया जाना
- 136. ऐसे दस्तावेजों या इलैक्ट्रानिक अभिलेखों का पेश किया जाना, जिन्हे कोई दूसरा व्यक्ति, जिसका उन पर कब्जा है, पेश करने से इंकार कर सकता था
- 137. इस आधार पर कि उत्तर उसे अपराध में फंसाएगा, साक्षी उत्तर देने से क्षम्य न होगा
- 138. सह अपराधी
- 139. साक्षियों की संख्या