BSA धारा 102: दस्तावेज के निबन्धनों में फेर-फार करने वाले करार का साक्ष्य कौन दे सकेगा
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · अध्याय 6: दस्तावेजी साक्ष्य द्वारा मौखिक साक्ष्य के अपवर्जन के विषय में
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102. वे व्यक्ति, जो किसी दस्तावेज के पक्षकार या उनके हित प्रतिनिधि नहीं हैं, ऐसे किन्हीं भी तथ्यों का साक्ष्य दे सकेंगे, जो दस्तावेज के निबन्धनों में फेर-फार करने वाले किसी समकालीन करार को दर्शित करने की प्रवृत्ति रखते हों ।
दृष्टांत
क और ख लिखित संविदा करते हैं कि क को कुछ कपास ख बेचेगा जिसके लिए संदाय कपास के परिदान किए जाने पर किया जाएगा | उसी समय वे एक माँखिक करार करते हैं कि क को तीन मास का प्रत्यय दिया जाएगा | क और ख के बीच यह तथ्य दर्शित नहीं किया जा सकता था किन्तु यदि यह ग के हित पर प्रभाव डालता है, तो यह ग द्वारा दर्शित किया जा सकेगा ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 94. दस्तावेजों के रूप में लेखबद्ध संविदाओं, अनुदानों और संपत्ति के अन्य व्ययनों के निबन्धनों का साक्ष्य
- 95. मौखिक करार के साक्ष्य का अपवर्जन
- 96. संदिग्धार्थ दस्तावेज को स्पष्ट करने या उसका संशोधन करने के साक्ष्य का अपवर्जन
- 97. विद्यमान तथ्यों को दस्तावेज के लागू होने के विरुद्ध साक्ष्य का अपवर्जन
- 98. विद्यमान तथ्यों के सर्दर्भ में अर्थशीन दस्तावेज के बारे मैं साक्ष्य
- 99. उस भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो कई व्यक्तियों में से केवल एक को लागू हो सकती है
- 100. तथ्यों के दो संवर्गों में से जिनमें से किसी एक को भी वह भाषा पूरी की पूरी ठीक-ठीक लागू नहीं होती, उसमें से एक को भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य
- 101. न पढ़ी जा सकने वाली लिपि आदि के अर्थ के बारे में साक्ष्य
- 103. भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के विल सम्बन्धी उपबन्धों की व्यावृत्ति