BSA धारा 98: विद्यमान तथ्यों के सर्दर्भ में अर्थशीन दस्तावेज के बारे मैं साक्ष्य
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 · अध्याय 6: दस्तावेजी साक्ष्य द्वारा मौखिक साक्ष्य के अपवर्जन के विषय में
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98. जबकि दस्तावेज में प्रयुक्त भाषा स्वयं स्पष्ट हो, किंतु विद्यमान तथ्यों के सर्दर्भ में अर्थहीन हो, तो यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य दिया जा सकेगा कि वह एक विशिष्ट भाव में प्रयुक्त की गई थी ।
दृष्टांत
ख को क “मेरा कोलकाता का गृह” विलेख द्वारा बेचता है | क का कोलकाता में कोई गृह नहीं था किन्तु यह प्रतीत होता है कि उसका हावड़ा में एक गृह था जो विलेख के निष्पादन के समय से ख के कब्जे में था | इन तथ्यों को यह दर्शित करने के लिए साबित किया जा सकेगा कि विलेख का सम्बन्ध हावड़ा के गृह से था ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 94. दस्तावेजों के रूप में लेखबद्ध संविदाओं, अनुदानों और संपत्ति के अन्य व्ययनों के निबन्धनों का साक्ष्य
- 95. मौखिक करार के साक्ष्य का अपवर्जन
- 96. संदिग्धार्थ दस्तावेज को स्पष्ट करने या उसका संशोधन करने के साक्ष्य का अपवर्जन
- 97. विद्यमान तथ्यों को दस्तावेज के लागू होने के विरुद्ध साक्ष्य का अपवर्जन
- 99. उस भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य जो कई व्यक्तियों में से केवल एक को लागू हो सकती है
- 100. तथ्यों के दो संवर्गों में से जिनमें से किसी एक को भी वह भाषा पूरी की पूरी ठीक-ठीक लागू नहीं होती, उसमें से एक को भाषा के लागू होने के बारे में साक्ष्य
- 101. न पढ़ी जा सकने वाली लिपि आदि के अर्थ के बारे में साक्ष्य
- 102. दस्तावेज के निबन्धनों में फेर-फार करने वाले करार का साक्ष्य कौन दे सकेगा
- 103. भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के विल सम्बन्धी उपबन्धों की व्यावृत्ति