BNSS धारा 450: न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों को वापस लेना
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 33: आपराधिक मामलों का स्थानांतरण
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450. (1) कोई भी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपने अधीनस्थ किसी भी मजिस्ट्रेट से कोई भी मामला वापस ले सकता है, या किसी भी मामले को वापस ले सकता है, जो उसने सौंपा है, और ऐसे मामले की जांच या सुनवाई स्वयं कर सकता है, या इसे जांच या परीक्षण के लिए संदर्भित कर सकता है। कोई अन्य ऐसा मजिस्ट्रेट इसकी जांच करने या प्रयास करने के लिए सक्षम है।
(2) कोई भी न्यायिक मजिस्ट्रेट धारा 212 की उपधारा (2) के तहत अपने द्वारा किसी अन्य मजिस्ट्रेट को सौंपे गए किसी भी मामले को वापस ले सकता है और ऐसे मामलों की जांच या सुनवाई स्वयं कर सकता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 446. मामलों और अपीलों को स्थानांतरित करने की सर्वोच्च न्यायालय की शक्ति
- 447. मामलों और अपीलों को स्थानांतरित करने की उच्च न्यायालय की शक्ति
- 448. मामलों और अपीलों को स्थानांतरित करने की सत्र न्यायाधीश की शक्ति
- 449. सत्र न्यायाधीशों द्वारा मामलों और अपीलों को वापस लेना
- 451. कार्यकारी मजिस्ट्रेटों द्वारा मामलों को सौंपना या वापस लेना
- 452. दर्ज किए जाने वाले कारण