BNSS धारा 449: सत्र न्यायाधीशों द्वारा मामलों और अपीलों को वापस लेना

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 33: आपराधिक मामलों का स्थानांतरण

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449. (1) एक सत्र न्यायाधीश किसी भी मामले या अपील को वापस ले सकता है, या किसी भी मामले या अपील को वापस ले सकता है जो उसने अपने अधीनस्थ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को सौंपा है।
(2) अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के समक्ष मामले की सुनवाई या अपील की सुनवाई शुरू होने से पहले किसी भी समय, एक सत्र न्यायाधीश किसी भी मामले या अपील को वापस ले सकता है जिसे उसने किसी अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को सौंप दिया है।
(3) जहां एक सत्र न्यायाधीश उप-धारा (1) या उप-धारा (2) के तहत मामले या अपील को वापस ले लेता है या वापस ले लेता है, वह या तो अपने न्यायालय में मामले की सुनवाई कर सकता है या अपील की सुनवाई स्वयं कर सकता है, या इसे तदनुसार समाप्त कर सकता है। इस संहिता के प्रावधानों के साथ, जैसा भी मामला हो, परीक्षण या सुनवाई के लिए किसी अन्य न्यायालय में भेजा जा सकता है।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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