BNSS धारा 269: प्रक्रिया जहां आरोपी को बरी नहीं किया जाता है
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 20: मजिस्ट्रेटों द्वारा वारंट-मामलों का परीक्षण
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269. (1) यदि, जब ऐसा साक्ष्य लिया गया हो, या मामले के किसी भी पिछले चरण में, मजिस्ट्रेट की राय है कि यह मानने का आधार है कि अभियुक्त ने इस अध्याय के तहत विचारणीय अपराध किया है, तो ऐसा मजिस्ट्रेट कौन है प्रयास करने में सक्षम और, उसकी राय में, उसके द्वारा पर्याप्त रूप से दंडित किया जा सकता है, वह आरोपी के खिलाफ लिखित रूप से आरोप तय करेगा।
(2) फिर आरोप को पढ़ा जाएगा और आरोपी को समझाया जाएगा, और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह दोषी मानता है या उसके पास कोई बचाव करने के लिए है।
(3) यदि अभियुक्त अपना दोष स्वीकार करता है, तो मजिस्ट्रेट याचिका दर्ज करेगा, और अपने विवेक से उसे दोषी ठहरा सकता है।
(4) यदि अभियुक्त पैरवी करने से इनकार करता है, या पैरवी नहीं करता है या मुकदमा चलाए जाने का दावा नहीं करता है या यदि अभियुक्त को उपधारा (3) के तहत दोषी नहीं ठहराया गया है, तो उसे अगली सुनवाई के प्रारंभ में यह बताना होगा। मामले में, या, यदि मजिस्ट्रेट कारणों को लिखित रूप में दर्ज करके उचित समझता है, तो तुरंत, क्या वह अभियोजन पक्ष के उन गवाहों में से किसी से जिरह करना चाहता है, और यदि हां, तो किसका साक्ष्य लिया गया है।
(5) यदि वह कहता है कि वह ऐसा चाहता है, तो उसके द्वारा नामित गवाहों को वापस बुलाया जाएगा और, जिरह और पुन: परीक्षा (यदि कोई हो) के बाद, उन्हें बरी कर दिया जाएगा।
(6) अभियोजन पक्ष के लिए बचे हुए किसी भी गवाह का साक्ष्य आगे लिया जाएगा, और जिरह और पुन: परीक्षा (यदि कोई हो) के बाद, उन्हें भी बरी कर दिया जाएगा।
(7) जहां, अभियोजन को अवसर देने के बावजूद और इस संहिता के तहत सभी उचित उपाय करने के बाद, यदि उप-धारा (5) और (6) के तहत अभियोजन पक्ष के गवाहों की उपस्थिति जिरह के लिए सुरक्षित नहीं की जा सकती है, तो यह होगा यह माना जाएगा कि उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसे गवाह की जांच नहीं की गई है, और मजिस्ट्रेट लिखित रूप में दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर अभियोजन साक्ष्य को बंद कर सकता है और रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्रियों के आधार पर मामले को आगे बढ़ा सकता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 261. धारा 230 का अनुपालन
- 262. जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा
- 263. आरोप तय करना
- 264. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 265. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 266. बचाव के लिए साक्ष्य
- 267. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 268. जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा
- 270. बचाव के लिए साक्ष्य
- 271. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 272. शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति
- 273. उचित कारण के बिना आरोप के लिए मुआवजा