BNSS धारा 263: आरोप तय करना
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 20: मजिस्ट्रेटों द्वारा वारंट-मामलों का परीक्षण
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263. (1) यदि, इस तरह के विचार, परीक्षण, यदि कोई हो, और सुनवाई पर, मजिस्ट्रेट की राय है कि यह मानने का आधार है कि अभियुक्त ने इस अध्याय के तहत विचारणीय अपराध किया है, जिसे ऐसा मजिस्ट्रेट आज़माने के लिए सक्षम है और जो, उसकी राय में, उसके द्वारा पर्याप्त रूप से दंडित किया जा सकता है, वह आरोप पर पहली सुनवाई की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर आरोपी के खिलाफ लिखित रूप से आरोप तय करेगा।
(2) फिर आरोप को पढ़ा जाएगा और आरोपी को समझाया जाएगा, और उससे पूछा जाएगा कि क्या वह लगाए गए अपराध के लिए दोषी मानता है या मुकदमा चलाने का दावा करता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 261. धारा 230 का अनुपालन
- 262. जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा
- 264. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 265. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 266. बचाव के लिए साक्ष्य
- 267. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 268. जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा
- 269. प्रक्रिया जहां आरोपी को बरी नहीं किया जाता है
- 270. बचाव के लिए साक्ष्य
- 271. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 272. शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति
- 273. उचित कारण के बिना आरोप के लिए मुआवजा