BNSS धारा 262: जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 20: मजिस्ट्रेटों द्वारा वारंट-मामलों का परीक्षण
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262. (1) आरोपी धारा 230 के तहत दस्तावेजों की प्रतियों की आपूर्ति की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर मुक्ति के लिए आवेदन कर सकता है।
(2) यदि धारा 193 के तहत पुलिस रिपोर्ट और उसके साथ भेजे गए दस्तावेजों पर विचार करने और अभियुक्त की ऐसी परीक्षा, यदि कोई हो, या तो शारीरिक रूप से या ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से, जैसा कि मजिस्ट्रेट आवश्यक समझता है और देने के बाद करता है। अभियोजन पक्ष और अभियुक्त को सुनवाई का अवसर दिया जाता है, मजिस्ट्रेट अभियुक्त के विरुद्ध आरोप को निराधार मानता है, वह अभियुक्त को आरोप मुक्त कर देगा, और ऐसा करने के लिए अपने कारण दर्ज करेगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 261. धारा 230 का अनुपालन
- 263. आरोप तय करना
- 264. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 265. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 266. बचाव के लिए साक्ष्य
- 267. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 268. जब आरोपी को बरी कर दिया जाएगा
- 269. प्रक्रिया जहां आरोपी को बरी नहीं किया जाता है
- 270. बचाव के लिए साक्ष्य
- 271. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि
- 272. शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति
- 273. उचित कारण के बिना आरोप के लिए मुआवजा