BNSS धारा 260: धारा 222 की उपधारा (2) के तहत शुरू किए गए मामलों में प्रक्रिया
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 19: सत्र न्यायालय के समक्ष परीक्षण
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260. (1) धारा 222 की उप-धारा (2) के तहत किसी अपराध का संज्ञान लेने वाला सत्र न्यायालय अदालत के समक्ष पुलिस रिपोर्ट के अलावा अन्यथा शुरू किए गए वारंट-मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया के अनुसार मामले की सुनवाई करेगा। मजिस्ट्रेट के:
बशर्ते कि जिस व्यक्ति के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया गया है, जब तक कि सत्र न्यायालय, दर्ज किए जाने वाले कारणों से, अन्यथा निर्देश न दे, अभियोजन के लिए एक गवाह के रूप में जांच की जाएगी।
(2) इस धारा के तहत प्रत्येक मुकदमे को बंद कमरे में आयोजित किया जाएगा यदि कोई भी पक्ष ऐसा चाहता है या यदि न्यायालय ऐसा करना उचित समझता है।
(3) यदि, ऐसे किसी भी मामले में, न्यायालय सभी या किसी भी आरोपी को आरोपमुक्त या बरी कर देता है और उसकी राय है कि उनके या उनमें से किसी के खिलाफ आरोप लगाने का कोई उचित कारण नहीं था, तो वह आरोपमुक्त करने के अपने आदेश द्वारा ऐसा कर सकता है। या बरी करना, उस व्यक्ति को निर्देश देना जिसके खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया गया था (राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या किसी राज्य के राज्यपाल या केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक के अलावा) को यह कारण बताने का निर्देश दें कि उसे ऐसे व्यक्ति को मुआवजा क्यों नहीं देना चाहिए अभियुक्त या प्रत्येक या ऐसे किसी भी अभियुक्त को, जब एक से अधिक हों।
(4) न्यायालय किसी भी कारण को रिकॉर्ड करेगा और उस पर विचार करेगा जो इस प्रकार निर्देशित व्यक्ति द्वारा दिखाया जा सकता है, और यदि वह संतुष्ट है कि आरोप लगाने के लिए कोई उचित कारण नहीं था, तो वह दर्ज किए जाने वाले कारणों के आधार पर आदेश दे सकता है कि पांच हजार रुपये से अधिक की ऐसी राशि का मुआवजा, जो वह निर्धारित कर सकता है, ऐसे व्यक्ति द्वारा अभियुक्तों को या उनमें से प्रत्येक या उनमें से किसी को भुगतान किया जाएगा।
(5) उप-धारा (4) के तहत दिया गया मुआवजा इस तरह वसूला जाएगा जैसे कि यह मजिस्ट्रेट द्वारा लगाया गया जुर्माना हो।
(6) कोई भी व्यक्ति जिसे उप-धारा (4) के तहत मुआवजा देने का निर्देश दिया गया है, ऐसे आदेश के कारण, इस धारा के तहत की गई शिकायत के संबंध में किसी भी नागरिक या आपराधिक दायित्व से छूट नहीं दी जाएगी:
बशर्ते कि इस धारा के तहत किसी आरोपी व्यक्ति को भुगतान की गई किसी भी राशि को उसी मामले से संबंधित किसी भी बाद के सिविल मुकदमे में ऐसे व्यक्ति को मुआवजा देने में ध्यान में रखा जाएगा।
(7) जिस व्यक्ति को उप-धारा (4) के तहत मुआवजा देने का आदेश दिया गया है, वह उस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है, जहां तक यह मुआवजे के भुगतान से संबंधित है।
(8) जब किसी आरोपी व्यक्ति को मुआवजे के भुगतान का आदेश दिया जाता है, तो अपील की प्रस्तुति के लिए अनुमत अवधि समाप्त होने से पहले, या यदि अपील प्रस्तुत की जाती है, तो अपील के समाप्त होने से पहले उसे मुआवजा नहीं दिया जाएगा। निर्णय लिया गया.
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।