BNSS धारा 251: आरोप तय करना
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 19: सत्र न्यायालय के समक्ष परीक्षण
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251. (1) यदि, उपरोक्त विचार और सुनवाई के बाद, न्यायाधीश की राय है कि यह मानने का आधार है कि अभियुक्त ने कोई अपराध किया है जो—
(ए) विशेष रूप से सत्र न्यायालय द्वारा विचारणीय नहीं है, वह आरोपी के खिलाफ आरोप तय कर सकता है और, आदेश द्वारा, मामले को सुनवाई के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, या प्रथम श्रेणी के किसी अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को स्थानांतरित कर सकता है और निर्देश दे सकता है आरोपी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, या प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने ऐसी तारीख पर उपस्थित होना होगा, जिसे वह उचित समझे, और उसके बाद ऐसा मजिस्ट्रेट पुलिस पर स्थापित वारंट-मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया के अनुसार अपराध की सुनवाई करेगा। रिपोर्ट;
(बी) विशेष रूप से न्यायालय द्वारा विचारणीय है, वह आरोप पर पहली सुनवाई की तारीख से साठ दिनों की अवधि के भीतर आरोपी के खिलाफ लिखित रूप से आरोप तय करेगा।
(2) जहां न्यायाधीश उपधारा (1) के खंड (बी) के तहत कोई आरोप तय करता है, वहां उपस्थित आरोपी को या तो शारीरिक रूप से या ऑडियो-वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आरोप पढ़ा और समझाया जाएगा और आरोपी से पूछा जाएगा कि क्या वह लगाए गए अपराध के लिए दोषी मानता है या मुकदमा चलाए जाने का दावा करता है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 248. मुकदमा लोक अभियोजक द्वारा चलाया जाएगा
- 249. अभियोजन के लिए मामला खोलना
- 250. डिस्चार्ज
- 252. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 253. अभियोजन साक्ष्य के लिए तारीख
- 254. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 255. दोषमुक्ति
- 256. बचाव में प्रवेश
- 257. तर्क
- 258. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि का निर्णय
- 259. पिछली सजा
- 260. धारा 222 की उपधारा (2) के तहत शुरू किए गए मामलों में प्रक्रिया