BNSS धारा 255: दोषमुक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 19: सत्र न्यायालय के समक्ष परीक्षण
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255. यदि, अभियोजन पक्ष के लिए साक्ष्य लेने, अभियुक्त की जांच करने और बिंदु पर अभियोजन और बचाव पक्ष को सुनने के बाद, न्यायाधीश मानता है कि कोई सबूत नहीं है कि अभियुक्त ने अपराध किया है, तो न्यायाधीश बरी करने का आदेश दर्ज करेगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 248. मुकदमा लोक अभियोजक द्वारा चलाया जाएगा
- 249. अभियोजन के लिए मामला खोलना
- 250. डिस्चार्ज
- 251. आरोप तय करना
- 252. दोष स्वीकार करने पर दोषसिद्धि
- 253. अभियोजन साक्ष्य के लिए तारीख
- 254. अभियोजन के लिए साक्ष्य
- 256. बचाव में प्रवेश
- 257. तर्क
- 258. दोषमुक्ति या दोषसिद्धि का निर्णय
- 259. पिछली सजा
- 260. धारा 222 की उपधारा (2) के तहत शुरू किए गए मामलों में प्रक्रिया