BNS धारा 157: उपेक्षा से लोक सेवक का ऐसे कैदी का निकल आगना सहन करना
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 7: राज्य के विरुद्ध अपराधों के विषय में
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157. जो कोई लोक सेवक होते हुए और किसी राजकैदी या युद्धकैदी को अभिरक्षा में रखते हुए उपेक्षा से ऐसे कैदी का किसी ऐसे परिरोध स्थान से जिसमें ऐसा कैदी परिस्द्ध है, निकल आगना सहन करेगा, वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 147. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करना या युद्ध करने का प्रयत्न करना या युद्ध करने का दुष्प्रेरण करना
- 148. धारा 147 द्वारा दंडनीय अपराधों को करने का षडयंत्र
- 149. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के आशय से आयुध आदि संग्रह करना
- 150. युद्ध करने की परिकल्पना को सुकर बनाने के आशय से छिपाना
- 151. किसी विधिपूर्ण शक्ति का प्रयोग करने के लिए विवश करने या उसका प्रयोग अवरोधित करने के आशय से राष्ट्रपति, राज्यपाल आदि पर हमला करना
- 152. भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कार्य
- 153. भारत सरकार से मैत्री संबंध रखने वाले किसी विदेशी राज्य के विरुद्ध युद्ध करना
- 154. भारत सरकार के साथ शांति का संबंध रखने वाले विदेशी राज्य के राज्यक्षेत्र में लूटपाट करना
- 155. धारा 53 और धारा 54 मैं वर्णित युद्ध या लूटपाट द्वारा ली गई सम्पत्ति प्राप्त करना
- 156. लोक सेवक का स्वेच्छया राजकैदी या युद्धकैदी को निकल आगने देना
- 158. ऐसे कैदी के निकल भागने में सहायता देना, उसे छुड़ाना या संश्रय देना