बिना वसीयत मृत्यु होने पर संपत्ति किसे मिलती है?

हिन्दू पुरुष की निर्वसीयती संपदा में वर्ग I, वर्ग II और शाखा-अंश समझें; यही सूची महिला की संपत्ति पर क्यों नहीं लगती, जानें।

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वारिस गिनने से पहले चार जाँचें

पहले लागू उत्तराधिकार कानून तय करें। फिर मृतक का अपना हित, उस संपत्ति पर प्रभावी वसीयत है या नहीं, और मृतक के बाद जीवित रिश्तेदारों को पहचानें—जिसमें पूर्व-मृत संतान के पात्र वंशज भी शामिल हो सकते हैं। कुछ संपत्ति की प्रभावी वसीयत हो तो भी दूसरी संपत्ति पर निर्वसीयती उत्तराधिकार हो सकता है: धारा 3(छ) उस संपत्ति के संदर्भ में निर्वसीयत बताती है जिसका प्रभावी वसीयती व्ययन नहीं हुआ।

इस पृष्ठ का वर्ग I/वर्ग II क्रम हिन्दू पुरुष के लिए केंद्रीय धारा 8 का क्रम है। महिला की निर्वसीयती संपत्ति में धाराएँ 15–16 और संपत्ति के स्रोत वाले अपवाद लागू होते हैं। मिताक्षरा सहदायिकी हित पहचानना हो तो धारा 6 अलग चरण है। दूसरे स्वामी के हिस्से वाली संपत्ति को पूरी मृतक की मानकर न बाँटें।

प्राथमिकता और अंश का आकार अलग हैं

धारा 8 पहले वर्ग I, उसके अभाव में वर्ग II, फिर गोत्रज और अंत में बन्धु का क्रम देती है। धारा 9 में वर्ग I के वारिस साथ लेते हैं और अन्य वर्गों को बाहर रखते हैं। वर्ग II एक साझा समूह नहीं है: पहले क्रम की प्रविष्टि बाद की प्रविष्टियों को बाहर रखती है। पिता वर्ग II की प्रविष्टि I में हैं; माता वर्ग I में। इसलिए पुरुष के वारिसों की सूची में माता और पिता की स्थिति समान नहीं है।

धारा 10 वर्ग I के अंश बाँटती है। विधवा एक अंश लेती है; एक से अधिक विधवाएँ हों तो वे मिलकर वही एक अंश लेती हैं। हर जीवित पुत्र, पुत्री और मृतक की माता को एक अंश मिलता है। प्रत्येक पूर्व-मृत पुत्र या पुत्री की पात्र शाखा के सदस्यों को मिलकर एक अंश मिलता है और आगे वितरण नियम 4 से होता है। इसलिए ‘वर्ग I साथ लेता है’ का अर्थ हर व्यक्तिगत वंशज का समान भिन्न नहीं है।

धारा 11 लागू वर्ग II की एक ही प्रविष्टि के वारिसों को बराबर अंश देती है। धाराएँ 12–13 गोत्रजों और बन्धुओं का डिग्रियों से क्रम बताती हैं। धारा 20 मृत्यु के समय गर्भ में स्थित और बाद में जीवित जन्मे बच्चे का अधिकार भी सुरक्षित करती है। वर्तमान परिवार-सूची में यह संभावना या पूर्व-मृत संतान के वंशज केवल इसलिए न छूटें कि उनके माता-पिता पहले मर गए।

किन दस्तावेजों से प्रश्न स्पष्ट होता है?

तारीख सहित परिवार-सूची, मृत्यु-विवरण, स्वामित्व और प्राप्ति के दस्तावेज, कोई वसीयत, पुराने विभाजन या त्याग के दस्तावेज तथा ऋण या सह-स्वामित्व की जानकारी तैयार करें। यह समझने के लिए तैयारी-सूची है, हर जगह की अनिवार्य दाखिला-सूची नहीं। विधिक वारिस प्रमाणपत्र, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र, भूमि का नामांतरण और स्वामित्व-विवाद अलग विषय हैं; अधिनियम किसी एक प्रमाणपत्र या नामांतरण प्रविष्टि को हर स्वामित्व-प्रश्न के समाधान का विकल्प नहीं बनाता।

पुरुष के निर्वसीयती उत्तराधिकार का क्रम

क्रमयह समूह कब आता है?
वर्ग Iपहले; पूरी अनुसूची और धारा 10 देखें
वर्ग IIवर्ग I न हो; पहली पात्र प्रविष्टि को अधिमान
गोत्रजदोनों वर्गों में वारिस न हो; धारा 12 का क्रम
बन्धुगोत्रज न हो; धारा 12 का क्रम

उदाहरण और अंश

एक पूर्व-मृत संतान की शाखा

HSA के अंतर्गत काल्पनिक पुरुष की निर्वसीयती संपदा: पात्र वर्ग I वारिस केवल विधवा, एक जीवित पुत्री, और पूर्व-मृत पुत्र की विधवा तथा उसका जीवित पुत्र हैं। मृतक की माता जीवित नहीं; अन्य शाखा या वारिस नहीं। वसीयत और प्रतिस्पर्धी स्वामित्व का प्रश्न नहीं।

मृतक की संपदा → तीन मुख्य अंश

  • विधवा: 1/3
  • जीवित पुत्री: 1/3
  • पूर्व-मृत पुत्र की शाखा: 1/3
    • उसकी विधवा: पूरी संपदा का 1/6
    • उसका पुत्र: पूरी संपदा का 1/6
पूरी संपदा में अंश
वारिसअंश
मृतक की विधवा1/3
जीवित पुत्री1/3
पूर्व-मृत पुत्र की विधवा1/6
पूर्व-मृत पुत्र का जीवित पुत्र1/6

धारा 10 में यहाँ तीन मुख्य अंश हैं, चार समान व्यक्तिगत अंश नहीं। पूर्व-मृत पुत्र की शाखा को एक-तिहाई मिलता है; नियम 4 इस उदाहरण में उसकी विधवा और पुत्र को शाखा का बराबर हिस्सा देता है। दोनों को पूरी संपदा का एक-छठा मिलता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मृतक के पिता वर्ग I की बेटी के साथ हिस्सा लेते हैं?

इस केंद्रीय धारा 8 के क्रम में वर्ग I, वर्ग II को बाहर रखता है। पिता की वर्ग II प्रविष्टि तभी आती है जब कोई वर्ग I वारिस न हो। अलग संपत्ति-हित या दूसरा लागू कानून हो तो अलग जाँच आवश्यक है।

क्या भाई-बहन विधवा के साथ अपने-आप बराबर हिस्सा लेते हैं?

नहीं। विधवा वर्ग I में है और भाई-बहन वर्ग II में हैं। बराबर बाँटने का हिसाब लगाने से पहले प्राथमिकता देखें।

क्या यही तालिका निर्वसीयत मरने वाली महिला के लिए लगा सकते हैं?

नहीं। धाराएँ 15–16 और माँ की संपत्ति वाला मार्गदर्शक पढ़ें। पात्र संतान या पूर्व-मृत संतान का बच्चा न हो तो कुछ विरासत में मिली संपत्ति का स्रोत उसका अगला वारिस-क्रम बदल सकता है।

संबंधित धाराएँ

यह क्रम कब लागू है?

ये केंद्रीय HSA के उदाहरण हैं। धारा 2 में लागू होने की शर्तें और अनुसूचित जनजातियों का अपवाद, धारा 5 की संपत्तियाँ, धारा 17 की विशेष व्यवस्था तथा राज्य कानून अलग जाँचें। उत्तराखंड के लागू UCC जैसे कानून उत्तराधिकार का क्रम बदल सकते हैं। उत्तराखंड का आधिकारिक UCC संदर्भ →

केवल संदर्भ के लिए; कानूनी सलाह नहीं। आधिकारिक HSA स्रोत →

विरासत के सभी मार्गदर्शक →