अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान

भगवद् गीता अध्याय 9, श्लोक 17

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संस्कृत श्लोक

पिताहमस्य जगतो माता धाता पितामहः।

वेद्यं पवित्रमोङ्कार ऋक्साम यजुरेव च॥

हिंदी अर्थ

इस संपूर्ण जगत्‌ का धाता अर्थात्‌ धारण करने वाला एवं कर्मों के फल को देने वाला, पिता, माता, पितामह, जानने योग्य, (गीता अध्याय 13 श्लोक 12 से 17 तक में देखना चाहिए) पवित्र ओंकार तथा ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद भी मैं ही हूँ

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि वे इस पूरे जगत के पिता और माता हैं। वे पालनहार (धाता) और पितामह (परदादा) भी हैं। यह इस बात को दर्शाता है कि भगवान ही सृष्टि के सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। वे सभी प्रकार के संबंधों के मूल में हैं और संसार की हर चीज़ का आधार हैं।

भगवान यह भी कहते हैं कि वेद में वर्णित सभी पवित्र वस्तुएं और ज्ञान के योग्य सभी चीज़ें उन्हीं के स्वरूप का वर्णन करती हैं। वे 'ॐ' स्वरूप हैं, जो कि ब्रह्म का प्रतीक है और सभी मंत्रों का सार है। वे ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद के रूप में भी प्रकट होते हैं। यह बताता है कि वेदों का सारा ज्ञान, जो मनुष्य को आत्मा और परमात्मा के रहस्य से परिचित कराता है, भगवान श्रीकृष्ण से ही उत्पन्न होता है और अंत में उन्हीं में विलीन हो जाता है।

इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह समझाने की कोशिश की है कि वह सृष्टि का प्रत्येक पहलू हैं और इसी कारण से वे प्रत्येक जीव के हृदय में निवास करते हैं। यह ज्ञान आत्मा के परमात्मा से एकरूपता की अनुभूति कराता है, जिससे व्यक्ति समस्त भौतिक बंधनों से मुक्त हो जाता है।