अध्याय 7: भगवद्ज्ञान

भगवद् गीता अध्याय 7, श्लोक 6

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संस्कृत श्लोक

एतद्योनीनि भूतानि सर्वाणीत्युपधारय।

अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा॥

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! तू ऐसा समझ कि सम्पूर्ण भूत इन दोनों प्रकृतियों से ही उत्पन्न होने वाले हैं और मैं सम्पूर्ण जगत का प्रभव तथा प्रलय हूँ अर्थात्‌ सम्पूर्ण जगत का मूल कारण हूँ

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को यह समझाने का प्रयास किया है कि समस्त सृष्टि का आधार वही हैं। "एतद्योनीनि भूतानि" का अर्थ है कि सभी प्राणी, चाहे वे स्थूल हों या सूक्ष्म, परमात्मा से ही उत्पन्न होते हैं। "योनि" का तात्पर्य स्त्रोत से है, और यहाँ भगवान कृष्ण यह बता रहे हैं कि समस्त सृष्टि का उद्गम उन्हीं से होता है।

"अहं कृत्स्नस्य जगतः प्रभवः प्रलयस्तथा" का तात्पर्य यह है कि सम्पूर्ण जगत की उत्पत्ति का कारण भी वही हैं और विनाश का भी। इसका अभिप्राय यह है कि भगवान की सत्ता अनादि और अनंत है। उनका यह ज्ञान अर्जुन को यह समझाने के लिए है कि भगवान की सर्वव्यापीता और सर्वशक्तिमानता को जानकर मनुष्य का विश्वास उनके प्रति अटूट हो जाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भगवान के बिना कुछ भी संभव नहीं है।

इस श्लोक के माध्यम से भगवान यह भी बता रहे हैं कि वे संसार की सभी क्रियाओं के अधिष्ठाता हैं। जब भी किसी प्राणी की उत्पत्ति होती है, वह उनकी शक्ति से होती है, और जब वह प्राणी समाप्त होता है, तब भी वह भगवान की ही शक्ति के कारण होता है। इस प्रकार, इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी सर्वशक्तिमानता और सर्वव्यापकता को स्पष्ट रूप से स्थापित किया है।

इस ज्ञान का मर्म समझकर अर्जुन को अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक होने और निस्वार्थ भाव से कार्य करने की प्रेरणा मिलती है।