अध्याय 7: भगवद्ज्ञान

भगवद् गीता अध्याय 7, श्लोक 15

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संस्कृत श्लोक

न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः।

माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः॥

हिंदी अर्थ

माया द्वारा जिनका ज्ञान हरा जा चुका है, ऐसे आसुर-स्वभाव को धारण किए हुए, मनुष्यों में नीच, दूषित कर्म करने वाले मूढ़ लोग मुझको नहीं भजते

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण उन लोगों की विशेषताएँ बताते हैं जो उन्हें नहीं मानते या उनके प्रति समर्पण नहीं करते। यहाँ भगवान कह रहे हैं:

दुष्कृतिनः (दुष्कृतिन) - वे लोग जो पापकर्म करने वाले हैं। मूढाः - जो अज्ञान या मूर्खता के कारण सही मार्ग को नहीं समझते। नराधमाः - जो अत्यंत नीच और पतित हैं। ये लोग, जो पाप और अज्ञान के कारण सही मार्ग से भटक गए हैं, भगवान को नहीं मानते। वे मायया अपहृतज्ञाना (माया द्वारा ज्ञान खो चुके हैं) और आसुरं भावमाश्रिताः (दैवीय गुणों से रहित और आसुरी स्वभाव को अपनाने वाले) हैं।

इस प्रकार, ऐसे लोग जो अपने पाप कर्मों और अज्ञान के कारण भगवान की उपासना या भक्ति से दूर रहते हैं, उन्हें भगवान के सच्चे ज्ञान और समर्पण की प्राप्ति नहीं होती। यह श्लोक यह भी दर्शाता है कि जो लोग आसुरी स्वभाव में होते हैं और जिनके ऊपर माया का प्रभाव होता है, वे सच्चे ज्ञान से वंचित रह जाते हैं और भगवान के प्रति समर्पण नहीं कर पाते।