अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग

भगवद् गीता अध्याय 15, श्लोक 12

पूरा अध्याय पढ़ें

संस्कृत श्लोक

(प्रभाव सहित परमेश्वर के स्वरूप का विषय)

यदादित्यगतं तेजो जगद्भासयतेऽखिलम्‌।

यच्चन्द्रमसि यच्चाग्नौ तत्तेजो विद्धि मामकम्‌॥

हिंदी अर्थ

सूर्य में स्थित जो तेज सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है तथा जो तेज चन्द्रमा में है और जो अग्नि में है- उसको तू मेरा ही तेज जान

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी दिव्य शक्ति और तेज के बारे में बताया है। इस श्लोक में तीन प्रकार के तेजों का उल्लेख किया गया है:

आदित्य में स्थित तेज़: यहाँ पर सूर्य के तेज़ की बात की जा रही है, जो सम्पूर्ण जगत को प्रकाशित करता है। सूर्य का तेज़ न केवल दिन को उजागर करता है, बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी के जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा भी प्रदान करता है।

चन्द्रमा में स्थित तेज़: चन्द्रमा का प्रकाश भी जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करता है। यह रात के समय में प्रकाश प्रदान करता है और कई प्राकृतिक प्रक्रियाओं जैसे ज्वारीय लहरों को प्रभावित करता है।

अग्नि में स्थित तेज़: अग्नि, जिसे हम रोजमर्रा के जीवन में उपयोग करते हैं, भी एक प्रकार का तेज़ है। यह जलाने, तपाने और ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है।

इन तीनों प्रकार के तेज़ों का स्रोत भगवान श्रीकृष्ण की परम शक्ति है। वे बताते हैं कि जो तेज़ सूर्य, चन्द्रमा और अग्नि में दिखाई देता है, वह वास्तव में उनकी ही शक्ति है। इस प्रकार, इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण अपने दिव्य तेज़ और परम सत्ता का परिचय देते हैं और यह संकेत देते हैं कि सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी तेज़ और प्रकाश है, वह उनकी ही शक्ति का प्रतिरूप है।