अध्याय 11: विराट रूप

भगवद् गीता अध्याय 11, श्लोक 7

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संस्कृत श्लोक

इहैकस्थं जगत्कृत्स्नं पश्याद्य सचराचरम्‌।

मम देहे गुडाकेश यच्चान्यद्द्रष्टमिच्छसि॥

हिंदी अर्थ

हे अर्जुन! अब इस मेरे शरीर में एक जगह स्थित चराचर सहित सम्पूर्ण जगत को देख तथा और भी जो कुछ देखना चाहता हो सो देख

(गुडाकेश- निद्रा को जीतने वाला होने से अर्जुन का नाम 'गुडाकेश' हुआ था)

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि वह अपने विराट रूप में संपूर्ण जगत को एक ही स्थान पर देख सकते हैं। यहाँ भगवान अपने दिव्य रूप में अर्जुन को यह दर्शन करवा रहे हैं कि संपूर्ण सृष्टि, जिसमें सभी जीव और निर्जीव तत्व शामिल हैं, एक ही स्थान पर—यानी भगवान के विराट रूप में—स्थित है।

"सचराचरम्" का मतलब है सभी चल और अचल प्राणियों का संग्रह। भगवान का विराट रूप सब कुछ समेटे हुए है—सभी जीव, प्राणी, और वस्तुएं—सभी एक ही स्थान पर, यानी भगवान के विराट रूप में देखी जा सकती हैं।

गुडाकेश, जो कि अर्जुन का एक उपनाम है (अर्जुन को "गुडाकेश" इसलिये कहा जाता है क्योंकि उन्होंने नींद को हराया है, "गुडाक" का मतलब नींद होता है), यहाँ भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को निर्देशित कर रहे हैं कि अगर वह कुछ और देखना चाहते हैं, तो बता दें।

इस प्रकार, भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को यह समझा रहे हैं कि उनका विराट रूप संपूर्ण सृष्टि को समेटे हुए है और उनके इस दिव्य रूप से वह सभी प्रकार की संभावनाओं को देख सकते हैं।