अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरिक्षण

भगवद् गीता अध्याय 1, श्लोक 33

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संस्कृत श्लोक

येषामर्थे काङक्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च।

त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च॥

हिंदी अर्थ

हमें जिनके लिए राज्य, भोग और सुखादि अभीष्ट हैं, वे ही ये सब धन और जीवन की आशा को त्यागकर युद्ध में खड़े हैं

सरल हिंदी व्याख्या

श्लोक 33: इस श्लोक में अर्जुन उन लोगों की सूची करता है जिनका निधन इस युद्ध में हो सकता है। इनमें गुरु (आचार्य), पिता, पुत्र और दादा (पितामह) शामिल हैं। वह इन रिश्तों की अहमियत को दर्शाते हुए यह व्यक्त करता है कि इन रिश्तेदारों को खोना बहुत कठिन होगा।