NI Act धारा 64: संदाय के लिए उपस्थापन
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 5: उपस्थापन के विषय में
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¶64. संदाय के लिए उपस्थापन—[(1)] वचन-पत्र, विनिमय-पत्र और चेक क्रमश: उसके रचयिता, प्रतिगृहीता या ऊपरवाल को एतस्ि◌मन्पश्चात् उपबंधित तौर पर संदाय के लिए धारक द्वारा या उसकी ओर से उपस्थापित किए जाने होंगे । ऐसे उपस्थापन में व्यतिक्रम होने पर उसके अन्य पक्षकार ऐसे धारक के प्रति उस पर दायी न होंगे ।
¶[जहां कि करार या प्रथा से ऐसा करना प्राधिकृत है वहां रजिस्ट्रीकृत चिट्ठी से डाकघर के माध्यम द्वारा उपस्थापन पर्याप्त है ।]
¶अपवाद—जहां कि वचन-पत्र मांग पर देय है और विनिर्दिष्ट स्थान पर देय नहीं है वहां उसके रचयिता को भारित करने के लिए कोई उपस्थापन आवश्यक नहीं है ।
¶[(2) धारा 6 में किसी बात के होते हुए भी, जहां संक्षेपित चेक का कोई इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप संदाय के लिए उपस्थापित किया जाता है, वहां ऊपरवाल बैंक, लिखत के प्रकट शब्दों की असलियत के बारे में किसी युक्तियुक्त संदेह की दशा में संक्षेपित चेक को धारण करने वाले बैंक से उक्त संक्षेपित चेक के संबंध में किसी और जानकारी की मांग करने का हकदार है और यदि संदेह लिखत में किसी कपट, कूटरचना, छेड़छाड़ या विनाश के बारे में है, तो वह सत्यापन के लिए संक्षेपित चेक के ही उपस्थापन की और मांग करने का हकदार है :
¶परंतु ऊपरवाल बैंक द्वारा इस प्रकार मांगा गया संक्षेपित चेक उसके द्वारा उस दशा में प्रतिधारित किया जाएगा जिसमें तदनुसार संदाय कर दिया जाता है ।]
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 61. प्रतिग्रहण के लिए उपस्थापन
- 62. वचन-पत्र को दर्शन के लिए उपस्थापित करना
- 63. ऊपरवाल को विचार-विमर्श करने के लिए समय
- 65. उपस्थापन के लिए समय
- 66. तारीख के पश्चात् या दर्शनोपरान्त देय लिखत के संदाय के उपस्थापन
- 67. किस्तों में देय वचन-पत्र का संदाय के लिए उपस्थापन
- 68. विनिर्दिष्ट स्थान में, न कि अन्यत्र, देय लिखत के संदाय के लिए उपस्थापन
- 69. निर्दिष्ट स्थान में देय लिखत
- 70. जहां कि कोई अनन्य स्थान विनिर्दिष्ट नहीं है वहां उपस्थापन
- 71. जबकि रचयिता आदि के कारबार या निवास का कोई ज्ञात स्थान नहीं है तब उपस्थापन
- 72. लेखीवाल को भारित करने के लिए चेक का उपस्थापन
- 73. किसी अन्य व्यक्ति को भारित करने के लिए चेक का उपस्थापन
- 74. मांग पर देय लिखत का उपस्थापन
- 75. अभिकर्ता, मृतक के विधिक प्रतिनिधि या दिवालिया के समनुदेशिती द्वारा या को उपस्थापन
- 75A. प्रतिग्रहण या संदाय के लिए उपस्थापन में विलम्ब के लिए प्रतिहेतु
- 76. उपस्थापन कब अनावश्यक होता है
- 77. संदाय के लिए उपस्थापित विनिमय-पत्र से उपेक्षा बरतने के लिए बैंककार का दायित्व