NI Act धारा 75A: प्रतिग्रहण या संदाय के लिए उपस्थापन में विलम्ब के लिए प्रतिहेतु

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 5: उपस्थापन के विषय में

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[75क. प्रतिग्रहण या संदाय के लिए उपस्थापन में विलम्ब के लिए प्रतिहेतु—[प्रतिग्रहण या संदाय के लिए] उपस्थापन में विलम्ब यदि धारक के नियंत्रण के परे की परिस्थितियों से हुआ है और उसके व्यतिक्रम, अवचार या उपेक्षा के कारण होने का दोष नहीं लगाया जा सकता तो वह माफी योग्य होगा । जब विलम्ब के कारण का परिविराम हो जाता है तब उपस्थापन युक्तियुक्त समय के अन्दर करना होगा ।]

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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