NI Act धारा 61: प्रतिग्रहण के लिए उपस्थापन
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 5: उपस्थापन के विषय में
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¶61. प्रतिग्रहण के लिए उपस्थापन—यदि दर्शनोपरान्त देय विनिमय-पत्र में उसके उपस्थापन के लिए कोई समय या स्थान विनिर्दिष्ट नहीं है तो उस व्यक्ति द्वारा जो उसके प्रतिग्रहण की मांग करने का हकदार है, उसके लिखे जाने के पश्चात् युक्तियुक्त समय के अन्दर और कारबार के दिन कारबार के समय में प्रतिग्रहण के लिए उसके ऊपरवाल को यदि वह युक्तियुक्त तलाश के पश्चात् पाया जा सके, उपस्थापित किया जाएगा । ऐसे उपस्थापन में व्यतिक्रम होने पर उसका कोई भी पक्षकार ऐसा व्यतिक्रम करने वाले पक्षकार के प्रति उस पर दायी न होगा ।
¶यदि ऊपरवाल युक्तियुक्त तलाश के पश्चात् न पाया जा सके तो विनिमय-पत्र अनाद्रत हो जाता है ।
¶यदि विनिमय-पत्र ऊपरवाल को किसी विशिष्ट स्थान पर निर्दिष्ट है तो वह उस स्थान पर ही उपस्थापित किया जाना चाहिए और यदि उपस्थापित करने के लिए सम्यक् तारीख को युक्तियुक्त तलाश के पश्चात् वह वहां न पाया जा सके तो विनिमय-पत्र अनाद्रत हो जाता है ।
¶[जहां कि करार या प्रथा से ऐसा करना प्राधिकृत है वहां रजिस्ट्रीकृत चिट्ठी से डाकघर के माध्यम द्वारा उपस्थापन पर्याप्त है ।]
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 62. वचन-पत्र को दर्शन के लिए उपस्थापित करना
- 63. ऊपरवाल को विचार-विमर्श करने के लिए समय
- 64. संदाय के लिए उपस्थापन
- 65. उपस्थापन के लिए समय
- 66. तारीख के पश्चात् या दर्शनोपरान्त देय लिखत के संदाय के उपस्थापन
- 67. किस्तों में देय वचन-पत्र का संदाय के लिए उपस्थापन
- 68. विनिर्दिष्ट स्थान में, न कि अन्यत्र, देय लिखत के संदाय के लिए उपस्थापन
- 69. निर्दिष्ट स्थान में देय लिखत
- 70. जहां कि कोई अनन्य स्थान विनिर्दिष्ट नहीं है वहां उपस्थापन
- 71. जबकि रचयिता आदि के कारबार या निवास का कोई ज्ञात स्थान नहीं है तब उपस्थापन
- 72. लेखीवाल को भारित करने के लिए चेक का उपस्थापन
- 73. किसी अन्य व्यक्ति को भारित करने के लिए चेक का उपस्थापन
- 74. मांग पर देय लिखत का उपस्थापन
- 75. अभिकर्ता, मृतक के विधिक प्रतिनिधि या दिवालिया के समनुदेशिती द्वारा या को उपस्थापन
- 75A. प्रतिग्रहण या संदाय के लिए उपस्थापन में विलम्ब के लिए प्रतिहेतु
- 76. उपस्थापन कब अनावश्यक होता है
- 77. संदाय के लिए उपस्थापित विनिमय-पत्र से उपेक्षा बरतने के लिए बैंककार का दायित्व