NI Act धारा 70: जहां कि कोई अनन्य स्थान विनिर्दिष्ट नहीं है वहां उपस्थापन
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 5: उपस्थापन के विषय में
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¶70. जहां कि कोई अनन्य स्थान विनिर्दिष्ट नहीं है वहां उपस्थापन—जो वचन-पत्र या विनिमय-पत्र धाराओं 68 और 69 में वर्णित तौर पर देय रचित नहीं है, उसे, यथास्थिति, उसके रचयिता, लेखीवाल या प्रतिगृहीतों के कारबार के स्थान में (यदि कोई हो) या प्रायिक निवास-स्थान में संदाय के लिए उपस्थापित करना होगा ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 61. प्रतिग्रहण के लिए उपस्थापन
- 62. वचन-पत्र को दर्शन के लिए उपस्थापित करना
- 63. ऊपरवाल को विचार-विमर्श करने के लिए समय
- 64. संदाय के लिए उपस्थापन
- 65. उपस्थापन के लिए समय
- 66. तारीख के पश्चात् या दर्शनोपरान्त देय लिखत के संदाय के उपस्थापन
- 67. किस्तों में देय वचन-पत्र का संदाय के लिए उपस्थापन
- 68. विनिर्दिष्ट स्थान में, न कि अन्यत्र, देय लिखत के संदाय के लिए उपस्थापन
- 69. निर्दिष्ट स्थान में देय लिखत
- 71. जबकि रचयिता आदि के कारबार या निवास का कोई ज्ञात स्थान नहीं है तब उपस्थापन
- 72. लेखीवाल को भारित करने के लिए चेक का उपस्थापन
- 73. किसी अन्य व्यक्ति को भारित करने के लिए चेक का उपस्थापन
- 74. मांग पर देय लिखत का उपस्थापन
- 75. अभिकर्ता, मृतक के विधिक प्रतिनिधि या दिवालिया के समनुदेशिती द्वारा या को उपस्थापन
- 75A. प्रतिग्रहण या संदाय के लिए उपस्थापन में विलम्ब के लिए प्रतिहेतु
- 76. उपस्थापन कब अनावश्यक होता है
- 77. संदाय के लिए उपस्थापित विनिमय-पत्र से उपेक्षा बरतने के लिए बैंककार का दायित्व