NI Act धारा 6: चेक
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 2: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के विषय में
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¶[6. चेक—एक ऐसा विनिमय-पत्र है जो विनिर्दिष्ट बैंककार पर लिखा गया है और उसका मांग पर से अन्यथा देय होना अभिव्यक्त नहीं है और इसके अंतर्गत संक्षेपित चेक का इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप और इलैक्ट्रानिक रूप में, चेक भी है ।
¶स्पष्टीकरण 1—इस धारा के प्रयोजनों के लिए,—
¶[(क) “इलैक्ट्रानिक रूप में चेक” से किसी कंप्यूटर साधन का उपयोग करके इलैक्ट्रानिक माध्यम से लिखा गया और किसी सुरक्षित प्रणाली में अंकीय चिह्नक (जैवमिति चिह्नक सहित या उसके बिना) सहित तथा, यथास्थिति, असममित गूढ़ प्रणाली या इलैक्ट्रानिक चिह्नक सहित लिखा गया कोई चेक अभिप्रेत है;]
¶(ख) “संक्षेपित चेक” से ऐसा चेक अभिप्रेत है जिसे समाशोधन चक्रण के अनुक्रम में, समाशोधन गृह द्वारा या बैंक द्वारा, पारेषण के लिए किसी इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप के उत्पादन पर तत्काल संदाय करे या प्राप्त करके, चेक का आगे का वास्तविक संचलन लिखित में प्रतिस्थापित करके, संक्षेपित किया गया है;
¶स्पष्टीकरण 2—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, “समाशोधन गृह” पद से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रबंधित समाशोधन गृह या भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उस रूप में मान्यताप्राप्त समाशोधन गृह अभिप्रेत है ।]
¶[स्पष्टीकरण 3—इस धारा के प्रयोजन के लिए, “असममित गूढ़ प्रणाली”, “कंप्यूटर साधन”, “अंकीय चिह्नक”, “इलैक्ट्रानिक रूप” और “इलैक्ट्रानिक चिह्नक” के क्रमश: वही अर्थ होंगे जो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (2000 का 21) में उनके हैं ।]
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 4. “वचन-पत्र”
- 5. “विनिमय-पत्र”
- 7. “लेखीवाल” । “ऊपरवाल”
- 8. “धारक”
- 9. “सम्यक्-अनुक्रम-धारक”
- 10. “सम्यक्-अनुक्रम में संदाय”
- 11. “अन्तर्देशीय लिखत”
- 12. “विदेशी लिखत”
- 13. “परक्राम्य लिखत”
- 14. परक्रामण
- 15. पृष्ठांकन
- 16. “निरंक” पृष्ठांकन और “पूर्ण” पृष्ठांकन
- 17. संदिग्धार्थी लिखत
- 18. जहां कि रकम अंकों और शब्दों में भिन्नत: कथित है
- 19. मांग पर देय लिखत
- 20. स्टाम्पित अधूरी लिखत
- 21. “दर्शन पर”
- 22. “परिपक्वता”
- 23. जो विनिमय-पत्र या वचन-पत्र तारीख या दर्शन से इतने मास के पश्चात् देय है उसकी परिपक्वता की गणना
- 24. जो विनिमय-पत्र या वचन-पत्र तारीख या दर्शन से इतने दिनों के पश्चात् देय है उसकी परिपक्वता की गणना
- 25. जब कि परिपक्वता का दिन लोक अवकाश दिन है