NI Act धारा 5: “विनिमय-पत्र”

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 2: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के विषय में

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5. “विनिमय-पत्र”—“विनिमय-पत्र” ऐसी लेखबद्ध लिखत है जिसमें एक निश्चित व्यक्ति को यह निदेश देने वाला उसके रचयिता द्वारा हस्ताक्षरित अशर्त आदेश, अन्तर्विष्ट हो कि वह एक निश्चित व्यक्ति को या उसके आदेशानुसार या उस लिखत के वाहक को ही धन की एक निश्चित राशि संदत्त करे ।

संदाय करने का वचन या आदेश इस धारा और धारा 4 के अर्थ में इस कारण “सशर्त” नहीं है कि उस रकम या उसकी किसी किस्त के संदाय के समय के बारे में यह अभिव्यक्त है कि वह किसी ऐसी विनिर्दिष्ट घटना के होने के पश्चात् एक निश्चित कालावधि के बीत जाने पर होगा जो मामूली मानवीय प्रत्याशा के अनुसार अवश्यम्भावी है, यद्यपि उसके होने का समय अनिश्चित हो ।

देय राशि इस धारा और धारा 4 के अर्थ में “निश्चित” मानी जा सकेगी, यद्यपि उसके अन्तर्गत भावी ब्याज हो या वह विनिमय की उपदर्शित दर पर देय हो या विनिमय के अनुक्रम के अनुसार हो और यद्यपि लिखत में यह उपबंध हो कि किसी किस्त के संदाय में व्यतिक्रम होने पर अदत्त अतिशेष शोध्य हो जाएगा ।

वह व्यक्ति, जिसके बारे में यह स्पष्ट है कि उसे निदेश दिया गया है या संदाय किया जाना है, इस धारा और धारा 4 के अर्थ में एक “निश्चित व्यक्ति” माना जा सकेगा यद्यपि उसका नाम अशुद्ध दिया गया हो या वह केवल वर्णन द्वारा ही अभिहित हो ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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