NI Act धारा 20: स्टाम्पित अधूरी लिखत

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 2: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों के विषय में

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20. स्टाम्पित अधूरी लिखत—जहां कि एक व्यक्ति [भारत] में परक्राम्य लिखत-संबंधी तत्समय प्रवृत्त विधि के अनुसार, स्टाम्पित और या तो पूर्णत: निरंक या उस पर अपूरित परक्राम्य लिखत लिखकर कोई कागज हस्ताक्षरित करता है और किसी दूसरे को परिदत्त कर देता है जहां वह उसके धारक को तद्द्वारा यह प्रथमदृष्ट्या प्राधिकार देता है कि वह किसी भी रकम के लिए जो उसमें विनिर्दिष्ट हो, और उस रकम से अधिक न हो जिसके लिए वह स्टाम्प पर्याप्त है, परक्राम्य लिखत उस पर, यथास्थिति, रच ले या पूर्ण कर ले । ऐसे हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति अपनी उस हैसियत में, जिसमें उसने उस पर हस्ताक्षर किया, किसी भी सम्यक्-अनुक्रम-धारक के प्रति ऐसी रकम के लिए ऐसी लिखत पर दायी होगा, परन्तु सम्यक्-अनुक्रम-धारक से भिन्न कोई भी व्यक्ति लिखत परिदत्त करने वाले व्यक्ति से उस रकम से अधिक कुछ वसूल न करेगा जो उसके द्वारा तद्धीन संदत्त की जाने के लिए आशयित थी ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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