BNSS धारा 208: भारत के बाहर किया गया अपराध
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 14: पूछताछ और परीक्षणों में आपराधिक अदालतों का क्षेत्राधिकार
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208. जब कोई अपराध भारत के बाहर किया जाता है—
(ए) भारत के नागरिक द्वारा, चाहे वह खुले समुद्र में हो या कहीं और; या
(बी) किसी व्यक्ति द्वारा, जो ऐसा नागरिक नहीं है, भारत में पंजीकृत किसी जहाज या विमान पर, उसके साथ ऐसे अपराध के संबंध में निपटा जा सकता है जैसे कि यह भारत के भीतर किसी भी स्थान पर किया गया हो जहां वह पाया जा सकता है या जहां अपराध भारत में पंजीकृत है:
बशर्ते कि, इस अध्याय के किसी भी पूर्ववर्ती खंड में कुछ भी होने के बावजूद, केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना भारत में ऐसे किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 197. पूछताछ और परीक्षण का सामान्य स्थान
- 198. पूछताछ या परीक्षण का स्थान
- 199. अपराध विचारणीय है जहां कार्य किया जाता है या परिणाम उत्पन्न होता है
- 200. परीक्षण का स्थान जहां कार्य अन्य अपराध के संबंध में अपराध है
- 201. कुछ अपराधों के मामले में परीक्षण का स्थान
- 202. इलेक्ट्रॉनिक संचार, पत्र आदि के माध्यम से किए गए अपराध
- 203. यात्रा या यात्रा के दौरान किया गया अपराध
- 204. एक साथ विचारणीय अपराधों के लिए सुनवाई का स्थान
- 205. विभिन्न सत्र प्रभागों में मामलों की सुनवाई का आदेश देने की शक्ति
- 206. संदेह की स्थिति में उच्च न्यायालय उस जिले का निर्णय करेगा जहां जांच या सुनवाई होगी
- 207. स्थानीय क्षेत्राधिकार से बाहर किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने की शक्ति
- 209. भारत के बाहर किए गए अपराधों से संबंधित साक्ष्य की प्राप्ति