BNSS धारा 205: विभिन्न सत्र प्रभागों में मामलों की सुनवाई का आदेश देने की शक्ति
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 14: पूछताछ और परीक्षणों में आपराधिक अदालतों का क्षेत्राधिकार
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205. इस अध्याय के पूर्ववर्ती प्रावधानों में किसी भी बात के बावजूद, राज्य सरकार यह निर्देश दे सकती है कि किसी भी जिले में मुकदमे के लिए प्रतिबद्ध किसी भी मामले या मामलों की श्रेणी की सुनवाई किसी भी सत्र प्रभाग में की जा सकती है:
बशर्ते कि ऐसा निर्देश संविधान के तहत, या इस संहिता या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय द्वारा पहले जारी किए गए किसी भी निर्देश के प्रतिकूल नहीं है।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 197. पूछताछ और परीक्षण का सामान्य स्थान
- 198. पूछताछ या परीक्षण का स्थान
- 199. अपराध विचारणीय है जहां कार्य किया जाता है या परिणाम उत्पन्न होता है
- 200. परीक्षण का स्थान जहां कार्य अन्य अपराध के संबंध में अपराध है
- 201. कुछ अपराधों के मामले में परीक्षण का स्थान
- 202. इलेक्ट्रॉनिक संचार, पत्र आदि के माध्यम से किए गए अपराध
- 203. यात्रा या यात्रा के दौरान किया गया अपराध
- 204. एक साथ विचारणीय अपराधों के लिए सुनवाई का स्थान
- 206. संदेह की स्थिति में उच्च न्यायालय उस जिले का निर्णय करेगा जहां जांच या सुनवाई होगी
- 207. स्थानीय क्षेत्राधिकार से बाहर किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने की शक्ति
- 208. भारत के बाहर किया गया अपराध
- 209. भारत के बाहर किए गए अपराधों से संबंधित साक्ष्य की प्राप्ति