BNSS धारा 201: कुछ अपराधों के मामले में परीक्षण का स्थान
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 14: पूछताछ और परीक्षणों में आपराधिक अदालतों का क्षेत्राधिकार
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201. (1) डकैती, या हत्या के साथ डकैती, डकैतों के गिरोह से संबंधित, या हिरासत से भागने के किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार के भीतर अपराध किया गया था या आरोपी व्यक्ति मिल गया है.
(2) किसी व्यक्ति के अपहरण या अपहरण के किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय अधिकार क्षेत्र के भीतर उस व्यक्ति का अपहरण या अपहरण किया गया था या उसे ले जाया गया था या छुपाया गया था या हिरासत में लिया गया था।
(3) चोरी, जबरन वसूली या डकैती के किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार के भीतर अपराध किया गया था या चोरी की संपत्ति जो अपराध का विषय है, इसे करने वाले किसी व्यक्ति के पास थी या किसी अन्य व्यक्ति के पास थी। जिसने यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए कि यह चोरी की संपत्ति है, ऐसी संपत्ति प्राप्त की या अपने पास रखी।
(4) आपराधिक हेराफेरी या आपराधिक विश्वासघात के किसी भी अपराध की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार के भीतर अपराध किया गया था या संपत्ति का कोई भी हिस्सा जो अपराध का विषय है, प्राप्त या रखा गया था, या आरोपी व्यक्ति द्वारा इसे लौटाया जाना या इसका हिसाब देना आवश्यक था।
(5) किसी भी अपराध जिसमें चोरी की गई संपत्ति का कब्ज़ा शामिल है, की जांच या मुकदमा उस न्यायालय द्वारा किया जा सकता है जिसके स्थानीय क्षेत्राधिकार के भीतर अपराध किया गया था या चोरी की संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति के पास थी जिसने इसे प्राप्त किया या इसे बनाए रखा, यह जानते हुए या विश्वास करने का कारण रखते हुए। चोरी की संपत्ति होना.
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 197. पूछताछ और परीक्षण का सामान्य स्थान
- 198. पूछताछ या परीक्षण का स्थान
- 199. अपराध विचारणीय है जहां कार्य किया जाता है या परिणाम उत्पन्न होता है
- 200. परीक्षण का स्थान जहां कार्य अन्य अपराध के संबंध में अपराध है
- 202. इलेक्ट्रॉनिक संचार, पत्र आदि के माध्यम से किए गए अपराध
- 203. यात्रा या यात्रा के दौरान किया गया अपराध
- 204. एक साथ विचारणीय अपराधों के लिए सुनवाई का स्थान
- 205. विभिन्न सत्र प्रभागों में मामलों की सुनवाई का आदेश देने की शक्ति
- 206. संदेह की स्थिति में उच्च न्यायालय उस जिले का निर्णय करेगा जहां जांच या सुनवाई होगी
- 207. स्थानीय क्षेत्राधिकार से बाहर किए गए अपराध के लिए समन या वारंट जारी करने की शक्ति
- 208. भारत के बाहर किया गया अपराध
- 209. भारत के बाहर किए गए अपराधों से संबंधित साक्ष्य की प्राप्ति