BNS धारा 46: दुष्प्रेरक
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 4: दुष्प्रेरण, आपराधिक षड़यंत्र और प्रयास के विषय में
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46. कोई व्यक्ति अपराध का दुष्प्रेरण करता है, जो या तो अपराध कारित करने का या ऐसे कृत्य को कारित करने का, जो अपराध होता, यदि वह उसी आशय या ज्ञान से किया जाता, जो दुष्प्रेरक का है, यदि अपराध कारित करने के लिए विधि द्वारा समर्थ व्यक्ति द्वारा किया जाता है ।
स्पष्टीकरण 1--किसी कार्य के अवैध लोप का दुष्प्रेरण अपराध की कोटि में आ सकेगा, चाहे दुष्प्रेरक उस कार्य को करने के लिए स्वयं आबद्ध न हो ।
स्पष्टीकरण 2--दुष्प्रेरेण का अपराध गठित होने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दुष्प्रेरित कार्य किया जाए या अपराध गठित करने के लिए अपेक्षित प्रभाव कारित हो ।
दृष्टांत
(क) ग की हत्या करने के लिए ख को क उकसाता है । ख वैसा करने से इन्कार कर देता है । क हत्या करने के लिए ख के दुष्प्रेरण का दोषी है ।
(ख) घ की हत्या करने के लिए ख को क उकसाता है । ख ऐसी उकसाहट के अनुसरण में घ को विद्ध करता है । घ का घाव अच्छा हो जाता है । क हत्या करने के लिए ख को उकसाने का दोषी है ।
स्पष्टीकरण 3--यह आवश्यक नहीं है कि दुष्प्रेरित व्यक्ति अपराध करने के लिए विधि-अनुसार समर्थ हो, या उसका वहीं दूषित आशय या ज्ञान हो, जो दुष्प्रेरक का है, या कोई भी दूषित आशय या ज्ञान हो ।
दृष्टांत
(क) क दूषित आशय से एक बालक या विकृत चित्त व्यक्ति को वह कार्य करने के लिए दुष्प्रेरित करता है, जो यदि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाए जो कोई अपराध करने के लिए विधि-अनुसार समर्थ है और वही आशय रखता है जो कि क का है, तो अपराध होगा । इस प्रकार, वह कार्य किया जाए या न किया जाए, क अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है ।
(ख) य की हत्या करने के आशय से ख को, जो सात वर्ष से कम आयु का बालक है, वह कार्य करने के लिए क उकसाता है जिससे य की मृत्यु कारित हो जाती है । ख दुष्प्रेरित के परिणामस्वरूप वह कार्य क की अनुपस्थिति में करता है और उससे य की मृत्यु कारित करता है । यहां यद्यपि ख वह अपराध करने के लिए विधि-अनुसार समर्थ नहीं था, तथापि क उसी प्रकार से दण्डनीय है, मानो ख वह अपराध करने के लिए विधि-अनुसार समर्थ हो और उसने हत्या की हो, और इसलिए क मृत्यु दण्ड से दण्डनीय है ।
(ग) ख को एक निवासगृह में आग लगाने के लिए क उकसाता है । ख चित-विकृति के परिणामस्वरूप उस कार्य की प्रकृति या यह कि वह जो कुछ कर रहा है वह दोषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है जानने में असमर्थ होने के कारण क के उकसाने के परिणामस्वरूप उस गृह में आग लगा देता है । ख ने कोई अपराध नहीं किया है, किन्तु क एक निवासगृह में आग जगाने के अपराध के दुष्प्रेरण का दोषी है, और उस अपराध के लिए उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है ।
(घ) क चोरी कराने के आशय से य के कब्जे में से य की सम्पत्ति लेने के लिए ख को उकसाता है । ख को यह विश्वास करने के लिए क उत्प्रेरित करता है कि वह सम्पत्ति क की है । ख उस सम्पत्ति का इस विश्वास से कि वह क की सम्पत्ति है, य के कब्जे में से सद्भावपूर्वक ले लेता है । ख इस भ्रम के अधीन कार्य करते हुए, उसे बेईमानी से नहीं लेता, और इसलिए चोरी नहीं करता ; किन्तु क चोरी के दुष्प्रेरण का दोषी है, और उसी दण्ड से दण्डनीय है, मानो ख ने चोरी की हो ।
स्पष्टीकरण 4-अपराध का दुष्प्रेरण अपराध होने कै कारण ऐसे दुष्प्रेरण का दुष्प्रेरण भी अपराध है ।
दृष्टान्त
ग को य की हत्या करने को उकसाने के लिए ख को क उकसाता है । ख तदनुकूल य की हत्या करने के लिए ख को उकसाता है और ख के उकसाने के परिणामस्वरूप ग उस अपराध को करता है । ख अपने अपराध के लिए हत्या के दण्ड से दण्डनीय है, और क ने उस अपराध को करने के लिए ख को उकसाया, इसलिए क ओ उसी दण्ड से दण्डनीय है ।
स्पष्टीकरण 5-षड़यंत्र द्वारा दुष्प्रेरण का अपराध करने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि दुष्प्रेरक उस अपराध को करने वाले व्यक्ति के साथ मिलकर उस अपराध की योजना बनाए । यह पर्याप्त है कि उस षड॒यंत्र में सम्मिलित हो जिसके अनुसरण में वह अपराध किया जाता है ।
दृष्टान्त
य को विष देने के लिए क एक योजना ख से मित्रकर बनाता है । यह सहमति हो जाती है कि क विष देगा । ख तब यह वर्णित करते हुए ग को वह योजना समझा दैता है कि कोई तीसरा व्यक्ति विष देगा, किन्तु क का नाम नहीं लेता । ग विष उपाप्त करने के लिए सहमत हो जाता है, और उसे उपाप्त करके समझाए गए प्रकार से प्रयोग में लाने के लिए ख को परिदत करता है । क विष देता है, परिणामस्वरूप य की मृत्यु हो जाती है । यहां, यद्यपि क और ग ने मिलकर षड॒यंत्र नहीं रचा है, तो भी ग उस षडयंत्र में सम्मिलित रहा है, जिसके अनुसरण में य की हत्या की गई है । इसलिए ग ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है और हत्या के लिए दण्ड से दण्डनीय है ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 45. किसी बात का दुष्प्रेरण
- 47. भारत से बाहर के अपराधों का भारत में दुष्प्रेरण
- 48. भारत में अपराधों का भारत से बाहर दुष्प्रेरण
- 49. दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित कार्य उसके परिणामस्वरूप किया जाए, और जहां कि उसके दण्ड के लिए कोई अभिव्यक्त उपबन्ध नहीं है
- 50. दुष्प्रेरण का दण्ड, यदि दुष्प्रेरित व्यक्ति दुष्प्रेरक के आशय से भिन्न आशय से कार्य करता है
- 51. दुष्प्रेरक का दायित्व जब एक कार्य का दुष्प्रेरण किया गया है और उससे भिन्न कार्य किया गया है
- 52. दुष्प्रेरक कब दुष्प्रेरित कार्य के ल्रिए और किए गए कार्य के लिए आकलित दण्ड से दण्डनीय है
- 53. दुष्प्रेरित कार्य से कारित उस प्रभाव के लिए दुष्प्रेर का दायित्व जो दुष्प्रेरक द्वारा आशयित से भिन्न हो
- 54. अपराध किए जाते समय दुष्प्रेरक की उपस्थिति
- 55. मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण
- 56. कारावास से दण्डनीय अपराध का दुष्प्रेरण
- 57. लोक साधारण द्वारा या दस से अधिक व्यक्तियों द्वारा अपराध किए जाने का दुष्प्रेरण
- 58. मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
- 59. किसी ऐसे अपराध के किए जाने की परिकल्पना का लोक सेवक द्वारा छिपाया जाना, जिसका निवारण करना उसका कर्तव्य है
- 60. कारावास से दंडनीय अपराध करने की परिकल्पना को छिपाना
- 61. आपराधिक षड़यंत्र
- 62. आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने के प्रयत्न करने के लिए दण्ड