BNS धारा 23: ऐसे व्यक्ति का कार्य जो अपनी इच्छा के विरुद्ध मत्तता में होने के कारण निर्णय पर पहुंचने में असमर्थ है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 3: साधारण अपवाद

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23. कोई बात अपराध नहीं है, जो ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है, जो उसे करते समय मत्तता के कारण उस कार्य की प्रकृति, या यह कि जो कुछ वह कर रहा है, वह दौषपूर्ण या विधि के प्रतिकूल है, जानने में असमर्थ है ; परंतु वह चीज़, जिससे उसकी मतता हुई थी, उसको अपने ज्ञान के बिना या इच्छा के विरुद्ध दी गई थी ।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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