BNS धारा 170: रिश्वत
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · अध्याय 9: निर्वाचन संबंधी अपराधों के विषय में
अन्य भाषाओं में भी: English
170. (1) जो कोई--
(i) किसी व्यक्ति को इस उद्देश्य से परितोषण देता है कि वह उस व्यक्ति को या किसी अन्य व्यक्ति को किसी निर्वाचन अधिकार का प्रयोग करने के लिए उत्प्रेरित करे या किसी व्यक्ति को इसलिए इनाम दे कि उसने ऐसे अधिकार का प्रयोग किया है; या
(ii) स्वयं अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई परितोषण ऐसे किसी अधिकार को प्रयोग में लाने के लिए या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसे किसी अधिकार को प्रयोग में ल्लाने के लिए उत्प्रेरित करने या उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करने के लिए इनाम के रूप में प्रतिगृहीत करता है,
वह रिश्वत का अपराध करता है :
परंतु लोक नीति की घोषणा या लोक कार्यवाही का वचन इस धारा के अधीन अपराध नहीं होगा ।
(2) जो व्यक्ति परितोषण देने की प्रस्थापना करता है या देने को सहमत होता है या उपाप्त करने की प्रस्थापना या प्रयत्न करता है, यह समझा जाएगा कि वह परितोषण देता है ।
(3) जो व्यक्ति परितोषण अभिप्राप्त करता है या प्रतिगृहीत करने को सहमत है या अभिप्राप्त करने का प्रयत्न करता है, यह समझा जाएगा कि वह परितोषण प्रतिगृहीत करता है और जो व्यक्ति वह बात करने के लिए, जिसे करने का उसका आशय नहीं है, हेतु स्वरूप, या जो बात उसने नहीं की है उसे करने के लिए इनाम के रूप में परितोषण प्रतिगृहीत करता है, यह समझा जाएगा कि उसने परितोषण को इनाम के रूप में प्रतिगृहीत किया है ।
यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 169. अभ्यर्थी, निर्वाचन अधिकार परिभाषित
- 171. निर्वचनों में असम्यक् असर डालना
- 172. निर्वाचनों में प्रतिरूपण
- 173. रिश्वत के लिए दण्ड
- 174. निर्वाचनों में असम्यक् असर डालने या प्रतिरूपण के लिए दण्ड
- 175. निर्वाचन के सित्रसिले में मिथ्या कथन
- 176. निर्वाचन के सिलसिले में अवैध संदाय
- 177. निर्वाचन लेखा रखने में असफलता