अध्याय 9: परम गुह्य ज्ञान

भगवद् गीता अध्याय 9, श्लोक 25

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संस्कृत श्लोक

यान्ति देवव्रता देवान्पितृन्यान्ति पितृव्रताः।

भूतानि यान्ति भूतेज्या यान्ति मद्याजिनोऽपि माम्‌॥

हिंदी अर्थ

देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं, पितरों को पूजने वाले पितरों को प्राप्त होते हैं, भूतों को पूजने वाले भूतों को प्राप्त होते हैं और मेरा पूजन करने वाले भक्त मुझको ही प्राप्त होते हैं। इसीलिए मेरे भक्तों का पुनर्जन्म नहीं होता (गीता अध्याय 8 श्लोक 16 में देखना चाहिए)

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने यह स्पष्ट किया है कि ईश्वर की पूजा और भक्ति के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को सर्वोत्तम लाभ प्राप्त होता है। अन्य देवताओं, पितरों या भूतों की पूजा करने से उनकी ही ओर मार्गदर्शन होता है, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से भक्त सीधे परमात्मा के पास पहुंचता है। यह श्लोक यह भी दर्शाता है कि विभिन्न पूजा विधियों के परिणाम भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन भगवान की पूजा करने से दिव्य और अनन्त प्रेम प्राप्त होता है, जो कि सभी के लिए सर्वोत्तम है।

इस प्रकार, यह श्लोक भक्ति और ईश्वर की पूजा के महत्व को स्पष्ट करता है और यह दर्शाता है कि एक सच्चे भक्त को सर्वोच्च आत्मा, श्रीकृष्ण, की पूजा करनी चाहिए।