अध्याय 2: गीता का सार
भगवद् गीता अध्याय 2, श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
अकीर्तिं चापि भूतानि
कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्।
सम्भावितस्य चाकीर्ति-
र्मरणादतिरिच्यते॥
हिंदी अर्थ
तथा सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति का भी कथन करेंगे और माननीय पुरुष के लिए अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है
सरल हिंदी व्याख्या
इस श्लोक का गहरा अर्थ यह है कि समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा का बहुत महत्व होता है। किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा उसके कर्मों से बनती है। यदि व्यक्ति अपने कर्तव्यों से पीछे हटता है, तो उसका नाम और मान-सम्मान भी घट जाता है। ऐसे में अर्जुन के लिए युद्ध से भागना उसकी वीरता और गौरव को कलंकित करने के समान होगा, जो कि मृत्यु से भी बदतर स्थिति है। यह श्लोक हमें अपने कर्तव्यों को निष्ठा और साहस के साथ निभाने की प्रेरणा देता है।