अध्याय 2: गीता का सार
भगवद् गीता अध्याय 2, श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
( सांख्ययोग का विषय )
श्री भगवानुवाच
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे।
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः॥
हिंदी अर्थ
श्री भगवान बोले, हे अर्जुन! तू न शोक करने योग्य मनुष्यों के लिए शोक करता है और पण्डितों के से वचनों को कहता है, परन्तु जिनके प्राण चले गए हैं, उनके लिए और जिनके प्राण नहीं गए हैं उनके लिए भी पण्डितजन शोक नहीं करते
सरल हिंदी व्याख्या
इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को समझा रहे हैं कि वे जिन बातों पर शोक कर रहे हैं, जैसे कि युद्ध में मरे हुए योद्धा, उन पर शोक करना अनुचित है। मृत्यु जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है और यह शाश्वत सत्य है कि जीवित और मृत्युपरांत सभी आत्माएँ अजर और अमर होती हैं। पंडित या ज्ञानी व्यक्ति किसी भी जीवित या मृत आत्मा के लिए शोक नहीं करते, क्योंकि वे जानते हैं कि आत्मा कभी मरती नहीं, बल्कि शरीर बदलती रहती है। इस प्रकार, अर्जुन का दुख और शोक करना उनके विवेक के विपरीत है और यह उनकी सच्ची ज्ञान की कमी को दर्शाता है।