अध्याय 16: दैवी तथा आसुरी स्वभाव

भगवद् गीता अध्याय 16, श्लोक 3

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संस्कृत श्लोक

तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहोनातिमानिता।

भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत॥

हिंदी अर्थ

तेज (श्रेष्ठ पुरुषों की उस शक्ति का नाम 'तेज' है कि जिसके प्रभाव से उनके सामने विषयासक्त और नीच प्रकृति वाले मनुष्य भी प्रायः अन्यायाचरण से रुककर उनके कथनानुसार श्रेष्ठ कर्मों में प्रवृत्त हो जाते हैं), क्षमा, धैर्य, बाहर की शुद्धि (गीता अध्याय 13 श्लोक 7 की टिप्पणी देखनी चाहिए) एवं किसी में भी शत्रुभाव का न होना और अपने में पूज्यता के अभिमान का अभाव- ये सब तो हे अर्जुन! दैवी सम्पदा को लेकर उत्पन्न हुए पुरुष के लक्षण हैं

सरल हिंदी व्याख्या

इस श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण दैवी सम्पत्ति के लक्षणों को वर्णित कर रहे हैं। यहाँ पर 'तेज', 'क्षमा', 'धृत' और 'शौच' इन गुणों को दैवी सम्पत्ति के संकेतक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

तेज: यह शक्ति और प्रभाव का प्रतीक है। एक व्यक्ति का तेज वह गुण है जो दूसरों को उसके सामने आदर्श व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है। यह आत्मविश्वास, शक्ति और प्रभाव का संयोजन होता है, जो नैतिक और श्रेष्ठ कर्मों की ओर प्रेरित करता है।

क्षमा: क्षमा का मतलब होता है दूसरों की गलतियों को माफ करना। दैवी गुण वाले व्यक्ति में क्षमा की भावना होती है, जो उन्हें ईर्ष्या और द्वेष से दूर रखती है।

धृत: यह धैर्य और स्थिरता को दर्शाता है। धृत वाले व्यक्ति की मनोदशा में स्थिरता होती है, और वह कठिन परिस्थितियों में भी आत्म-नियंत्रण बनाए रखता है।

शौच: शौच का तात्पर्य शारीरिक और मानसिक शुद्धता से है। इसका अर्थ है स्वच्छता, पवित्रता और ईमानदारी। यह बाहरी स्वच्छता के साथ-साथ आंतरिक पवित्रता को भी शामिल करता है।

अद्रोह: किसी भी व्यक्ति के प्रति शत्रुभाव का न होना। इसका मतलब है कि वह सभी के प्रति मित्रवत और सौम्य होता है, और किसी के प्रति भी द्वेष या दुश्मनी का भाव नहीं रखता।

अतिमानिता: अपने आप को दूसरों से ऊँचा समझने की प्रवृत्ति का अभाव। दैवी गुण वाले व्यक्ति में अभिमान और घमंड की कमी होती है, और वह अपने स्वभाव में विनम्र और सरल होता है।

इन गुणों को अपनाने वाले व्यक्ति दैवी सम्पत्ति से सम्पन्न होते हैं और उनके आचरण में इन गुणों की उपस्थिति उनके दैवीय स्वभाव को दर्शाती है।

इस प्रकार, श्लोक 3 में दैवी गुणों का विवरण देते हुए भगवान श्रीकृष्ण यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि इन गुणों से युक्त व्यक्ति का चरित्र कितना उच्च और आदर्श होता है।