अध्याय 14: प्रकृति के तीन गुण

भगवद् गीता अध्याय 14, श्लोक 11

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संस्कृत श्लोक

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते।

ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत॥

हिंदी अर्थ

जिस समय इस देह में तथा अन्तःकरण और इन्द्रियों में चेतनता और विवेक शक्ति उत्पन्न होती है, उस समय ऐसा जानना चाहिए कि सत्त्वगुण बढ़ा है

सरल हिंदी व्याख्या

चेतना, और विवेक की वृद्धि से।

जब मनुष्य के मन, बुद्धि और इन्द्रियों में स्पष्टता, समझ और ज्ञान का संचार होता है, तो यह संकेत है कि उसमें सत्त्वगुण की वृद्धि हो रही है। सत्त्वगुण वह गुण है जो शांति, पवित्रता, और सामंजस्य का प्रतीक है।

इस श्लोक के माध्यम से यह बताया गया है कि सत्त्वगुण की प्रधानता के समय मनुष्य के विचार, कर्म, और दृष्टिकोण में स्पष्टता और शुद्धता आ जाती है। उसके विवेकशीलता में वृद्धि होती है, जिससे वह सही और गलत का भेद स्पष्ट रूप से कर पाता है। इस अवस्था में व्यक्ति की चेतना उन्नत होती है, और वह जीवन के सत्य को समझने की दिशा में अग्रसर होता है।

संक्षेप में: जब हमारे भीतर ज्ञान और विवेक का प्रकाश प्रकट होता है और हमारे मन और इन्द्रियाँ शुद्ध और स्पष्ट हो जाती हैं, तब समझना चाहिए कि हमारे भीतर सत्त्वगुण का विस्तार हो रहा है। यह सत्त्वगुण ही है जो हमें उच्चतर चेतना और आंतरिक शांति की ओर ले जाता है।