अध्याय 1: कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में सैन्य निरिक्षण
भगवद् गीता अध्याय 1, श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत॥
हिंदी अर्थ
कुल के नाश से सनातन कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं तथा धर्म का नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है
सरल हिंदी व्याख्या
यह श्लोक महाभारत के भीष्मपर्व की संगीनी श्लोकों में से एक है। यहाँ अर्जुन भगवान कृष्ण से कह रहा है कि जब अधर्म और दुष्कर्मों का प्रकोप बढ़ता है, तो समाज में स्त्रियों की स्थिति भी दयनीय हो जाती है। जब स्त्रियाँ असभ्य हो जाती हैं, तब कुल में वर्णसंकरता और अनैतिकता का जन्म होता है।
इस श्लोक के माध्यम से अर्जुन यह इंगित कर रहा है कि अधर्म और अनैतिकता समाज के सभी वर्गों को प्रभावित करती है, और इससे कुल की पवित्रता और संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यह श्लोक समाज की नैतिकता और संस्कारों के महत्व को दर्शाता है और यह भी बताता है कि स्त्रियाँ समाज की नैतिक और सांस्कृतिक धरोहर की महत्वपूर्ण संरक्षक होती हैं। जब समाज में पतन और अशांति आती है, तो इसका सीधा असर स्त्रियों की स्थिति और समाज की संरचना पर पड़ता है।