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विनिमय: संपत्ति के बदले संपत्ति

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विनिमय पारस्परिक स्वामित्व-अंतरण पर आधारित है, केवल नकद भुगतान न होने पर नहीं।

धारा 118 में दो व्यक्ति एक वस्तु के स्वामित्व के बदले दूसरी का स्वामित्व परस्पर अंतरित करते हैं, जब दोनों वस्तुओं में से कोई भी केवल धन न हो या दोनों केवल धन हों। अंतरण संबंधित संपत्ति के विक्रय के लिए विहित रीति से पूरा होता है; अदला-बदली औपचारिकताओं से बचने का मार्ग नहीं है।

धारा 119 दूसरे पक्ष के हक में दोष से विनिमय की चीज से वंचित होने पर, अपनी शर्तों और विपरीत संविदात्मक आशय के अधीन, अधिकार देती है। धारा 120 में हर पक्ष दी गई चीज का विक्रेता और प्राप्त चीज का क्रेता है। धारा 121 धन के विनिमय से अलग संबंधित है।

काल्पनिक उदाहरण

फराह और अरुण दो भूखंडों का विनिमय चाहते हैं। उन्हें धारा 118 की विक्रय-रीति, अपना-अपना हक और हक के दोष से प्राप्त भूखंड खोने पर धारा 119 के अधिकार देखने होंगे।

संबंधित धाराएँ

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सीमाएँ और सावधानियाँ

  • विनिमय नाम होने से बराबर मूल्य, कर-मुक्ति या कम स्टाम्प शुल्क का निष्कर्ष न निकालें।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय 6: अभ्यास

उत्तर चुनें और जाँचें। अंक आपके ब्राउज़र में रहते हैं। हर व्याख्या संबंधित धारा से जुड़ी है।

  1. 1.क्या अंतरण को विनिमय कहने से विक्रय-रीति की औपचारिकताएँ हट जाती हैं?
  2. 2.धारा 120 सामान्यतः हर पक्ष को कैसे बताती है?
विक्रय, बंधक, पट्टा, विनिमय और दान की तुलना →

संविदा कानून से संबंध

क्षमता, सहमति और वैध उद्देश्य के लिए भारतीय संविदा अधिनियम के उपलब्ध अंग्रेज़ी पाठ देखें। हिंदी ICA पाठ अभी उपलब्ध नहीं है।

मौलिक शैक्षिक व्याख्या और काल्पनिक उदाहरण; यह व्यक्तिगत कानूनी सलाह या संपत्ति के हक की जाँच नहीं है।

कानूनी पाठ का आधिकारिक संदर्भ: भारत सरकार का हिंदी संदर्भ पाठ