NI Act धारा 89: जिस लिखत पर परिवर्तन दृश्यमान नहीं है उसका संदाय
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 7: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों पर दायित्व से उन्मोचन के विषय में
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¶89. जिस लिखत पर परिवर्तन दृश्यमान नहीं है उसका संदाय—[(1)] जहां कि वचन-पत्र, विनिमय-पत्र या चेक तात्त्विक रूप में परिवर्तित किया गया है किन्तु यह प्रतीत नहीं होता है कि वह ऐसे परिवर्तित किया गया है,
¶या जहां कि ऐसा चेक जो कि उपस्थापन के समय ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वह क्रास किया हुआ है अथवा उस पर क्रासिंग थी जो मिटा दी गई है, संदाय के लिए उपस्थापित किया जाता है,
¶वहां संदाय के लिए दायी व्यक्ति और या बैंककार द्वारा उसका संदाय और संदाय के समय उसके प्रकट शब्दों के अनुकूल और सम्यक्-अनुक्रम में अन्यथा उसके संदाय से ऐसा व्यक्ति या बैंककार उसके सब दायित्व से उन्मोचित हो जाएगा और ऐसा संदाय लिखत के परिवर्तन किए जाने या चेक के क्रास किए जाने के कारण प्रश्नगत न किया जाएगा ।
¶[(2) जहां चेक संक्षेपित चेक का कोई इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप है, वहां ऐसे इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप और संक्षेपित चेक के प्रकट शब्दों में कोई अंतर तात्त्विक परिवर्तन होगा और, यथास्थिति, बैंक या समाशोधन गृह का यह कर्तव्य होगा कि वह प्रतिरूप का संक्षेपण और पारेषण करते समय, संक्षेपित चेक के इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप के प्रकट शब्दों की यथार्थता को सुनिश्चित कर ले ।
¶(3) कोई ऐसा बैंक या समाशोधन गृह, जो संक्षेपित चेक के पारेषित इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप को प्राप्त करता है, उस पक्षकार से, जिसने उसको प्रतिरूप पारेषित किया है, यह सत्यापित करेगा कि उसे इस प्रकार पारेषित और उसके द्वारा प्राप्त प्रतिरूप बिल्कुल एक ही हैं ।]
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 82. दायित्व से उन्मोचन
- 83. ऊपरवाल को प्रतिग्रहण के लिए अड़तालीस घण्टे से अधिक समय अनुज्ञात करने से उन्मोचन
- 84. जब कि चेक सम्यक् रूप से उपस्थापित नहीं किया गया और लेखीवाल को तद्द्वारा नुकसान हुआ
- 85. आदेशानुसार देय चेक
- 85A. आदेशानुसार देय ड्राफ्ट जो बैंक की एक शाखा ने दूसरी शाखा पर लिखे हैं
- 86. सम्मत न होने वाले पक्षकार विशेषित या सीमित प्रतिग्रहण द्वारा उन्मोचित हो जाते हैं
- 87. तात्त्विक परिवर्तन का प्रभाव
- 88. पूर्विक परिवर्तन के होते हुए भी प्रतिगृहीता या पृष्ठांकक आबद्ध रहता है
- 90. प्रतिगृहीता के हाथों में के विनिमय-पत्र पर कार्यवाही करने के अधिकारों का निर्वापन