NI Act धारा 86: सम्मत न होने वाले पक्षकार विशेषित या सीमित प्रतिग्रहण द्वारा उन्मोचित हो जाते हैं
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 7: वचन-पत्रों, विनिमय-पत्रों और चेकों पर दायित्व से उन्मोचन के विषय में
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¶86. सम्मत न होने वाले पक्षकार विशेषित या सीमित प्रतिग्रहण द्वारा उन्मोचित हो जाते हैं—यदि विनिमय-पत्र का धारक से प्रतिग्रहण से उपमत हो जाता है जो विशेषित है, या विनिमय-पत्र में वर्णित राशि के एक भाग तक सीमित है या जो संदाय के लिए कोई भिन्न स्थान या समय प्रतिस्थापित करता है या जो उस दशा में जहां कि ऊपरवाल भागीदार नहीं है, उन सब के द्वारा हस्ताक्षरित नहीं है तो जब तक कि वे सब पूर्विक पक्षकार, जिनकी ऐसे प्रतिग्रहण के लिए सम्मति अभिप्राप्त नहीं की गई है, धारक द्वारा सूचना दी जाने पर ऐसे प्रतिग्रहण के लिए अपनी अनुमति नहीं दे देते वे जहां तक कि धारक और उनसे व्युत्पन्न अधिकार के अधीन दावा करने वालों का संबंध है, उन्मोचित हो जाते हैं ।
¶स्पष्टीकरण—प्रतिग्रहण वहां विशेषित होता है—
¶(क) जहां कि वह सशर्त है अर्थात् यह घोषित करता है कि संदाय उसमें कथित घटना के होने पर निर्भर करेगा,
¶(ख) जहां कि वह संदत्त की जाने के लिए आदिष्ट राशि के केवल भाग के संदाय का वचन देता है,
¶(ग) जहां कि आदेश में संदाय के लिए कोई स्थान विनिर्दिष्ट न होते हुए वह विनिर्दिष्ट स्थान में, न कि अन्यथा या अन्यत्र, संदाय का वचन देता है अथवा जहां कि आदेश में संदाय का स्थान विनिर्दिष्ट होते हुए वह किसी दूसरे स्थान में, न कि अन्यथा या अन्यत्र, संदाय का वचन देता है,
¶(घ) जहां कि वह उस समय से भिन्न समय पर संदाय का वचन देता है जिस समय पर आदेश के अधीन वह वैध रूप से शोध्य होगा ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 82. दायित्व से उन्मोचन
- 83. ऊपरवाल को प्रतिग्रहण के लिए अड़तालीस घण्टे से अधिक समय अनुज्ञात करने से उन्मोचन
- 84. जब कि चेक सम्यक् रूप से उपस्थापित नहीं किया गया और लेखीवाल को तद्द्वारा नुकसान हुआ
- 85. आदेशानुसार देय चेक
- 85A. आदेशानुसार देय ड्राफ्ट जो बैंक की एक शाखा ने दूसरी शाखा पर लिखे हैं
- 87. तात्त्विक परिवर्तन का प्रभाव
- 88. पूर्विक परिवर्तन के होते हुए भी प्रतिगृहीता या पृष्ठांकक आबद्ध रहता है
- 89. जिस लिखत पर परिवर्तन दृश्यमान नहीं है उसका संदाय
- 90. प्रतिगृहीता के हाथों में के विनिमय-पत्र पर कार्यवाही करने के अधिकारों का निर्वापन