NI Act धारा 131: चेक का संदाय प्राप्त करने वाले बैंककार का अदायित्व

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 14: क्रास चेकों के विषय में

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131. चेक का संदाय प्राप्त करने वाले बैंककार का अदायित्व—जिस बैंककार ने अपने पक्ष में साधारणत: या विशेषत: क्रास किए हुए चेक का संदाय अपने व्यवहारी लेखे सद्भावपूर्वक और उपेक्षा बिना प्राप्त किया है वह बैंककार उस चेक पर हक के त्रुटिपूर्ण साबित होने की दशा में सही स्वामी के प्रति कोई दायित्व ऐसा संदाय प्राप्त करने के कारण ही उपगत न करेगा ।

[स्पष्टीकरण [1]—बैंककार क्रास चेक का संदाय अपने किसी व्यवहारी लेखे इस धारा के अर्थ में प्राप्त करता है यद्यपि चेक का संदाय प्राप्त करने के पूर्व वह चेक की रकम अपने व्यवहारी के खाते में जमा कर देता है ।]

[स्पष्टीकरण 2—उस बैंककार का, जो उसके पास धारित संक्षेपित चेक के इलैक्ट्रानिक प्रतिरूप के आधार पर संदाय प्राप्त करता है, यह कर्तव्य होगा कि वह संक्षेपित किए जाने वाले चेक की प्रथमदृष्ट्या असलियत का और लिखत के दृश्यमात्र से प्रकट किसी कपट, कूटरचना या छेड़दाड़ का, जिसका सत्यापन सम्यक् तत्परता और मामूली सावधानी से किया जा सकता है, सत्यापन कर ले ।]

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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