NI Act धारा 129: क्रास चेक का सम्यक् अनुक्रम के बाहर संदाय
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 14: क्रास चेकों के विषय में
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¶129. क्रास चेक का सम्यक् अनुक्रम के बाहर संदाय—कोई भी बैंककार जो साधारणत: क्रास किए गए चेक का संदाय किसी बैंककार को करने से अन्यथा करता है या विशेषत: क्रास किए हुए चेक का संदाय उस बैंककार को, जिसके पक्ष में वह क्रास किया गया है, या संग्रहण करने के लिए उसके अभिकर्ता को, जो स्वयं बैंककार है, करने से अन्यथा करता है, वह चेक के सही स्वामी के प्रति उस हानि के लिए दायी होगा जो ऐसा स्वामी चेक का संदाय ऐसे किए जाने के कारण उठाए ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 123. साधारणत: क्रास किया हुआ चेक
- 124. विशेषत: क्रास किया हुआ चेक
- 125. चेक काटने के पश्चात् उसे क्रास करना
- 126. साधारणत: क्रास किए हुए चेक का संदाय
- 127. एक से अधिक बार विशेषत: क्रास किए हुए चेक का संदाय
- 128. क्रास चेक का सम्यक् अनुक्रम में संदाय
- 130. “परक्राम्य नहीं है” यह शब्द वाला चेक
- 131. चेक का संदाय प्राप्त करने वाले बैंककार का अदायित्व
- 131A. ड्राफ्टों को अध्याय का लागू होना