NI Act धारा 114: आदरणार्थ संदाय करने वाले का अधिकार
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 11: आदरणार्थ प्रतिग्रहण और संदाय के विषय में तथा आवश्यकता की दशा में निर्देशन के विषय में
अन्य भाषाओं में भी: English
¶114. आदरणार्थ संदाय करने वाले का अधिकार—ऐसे संदाय करने वाला कोई भी व्यक्ति विनिमय-पत्र के बारे में उन सब अधिकारों का हकदार है जो ऐसे संदाय के समय धारक के हैं और उस पक्षकार से, जिसके आदरणार्थ उसने संदाय किया है, इस भांति संदत्त सब राशियों को उन पर ब्याज सहित और ऐसा संदाय करने में समुचित रूप से उपगत सब व्ययों सहित वसूल कर सकेगा ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
यह पाठ केवल संदर्भ के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक स्रोत देखें।
इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 108. आदरणार्थ प्रतिग्रहण
- 109. आदरणार्थ प्रतिग्रहण कैसे करना चाहिए
- 110. यह विनिर्दिष्ट किए बिना कि प्रतिग्रहण करके आदरणार्थ किया गया है, प्रतिग्रहण
- 111. आदरणार्थ प्रतिगृहीता का दायित्व
- 112. आदरणार्थ प्रतिगृहीता कब भारित किया जा सकेगा
- 113. आदरणार्थ संदाय
- 115. जिकरीवाल
- 116. बिना प्रसाक्ष्य के प्रतिग्रहण और संदाय