NI Act धारा 109: आदरणार्थ प्रतिग्रहण कैसे करना चाहिए
परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 11: आदरणार्थ प्रतिग्रहण और संदाय के विषय में तथा आवश्यकता की दशा में निर्देशन के विषय में
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¶109. आदरणार्थ प्रतिग्रहण कैसे करना चाहिए—जो व्यक्ति आदरणार्थ प्रतिग्रहण करना चाहता है उसे [विनिमय-पत्र पर अपने हस्ताक्षर करके लिखित रूप में] घोषणा करनी होगी कि वह प्रसाक्ष्यित विनिमय-पत्र का प्रतिग्रहण लेखीवाल के या किसी विशिष्ट पृष्ठांकक के, जिसका वह नाम दे, आदरणार्थ या असाधारणत: आदरणार्थ प्रसाक्ष्याधीन करता है *** ।
आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें
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इस अध्याय की अन्य धाराएँ
- 108. आदरणार्थ प्रतिग्रहण
- 110. यह विनिर्दिष्ट किए बिना कि प्रतिग्रहण करके आदरणार्थ किया गया है, प्रतिग्रहण
- 111. आदरणार्थ प्रतिगृहीता का दायित्व
- 112. आदरणार्थ प्रतिगृहीता कब भारित किया जा सकेगा
- 113. आदरणार्थ संदाय
- 114. आदरणार्थ संदाय करने वाले का अधिकार
- 115. जिकरीवाल
- 116. बिना प्रसाक्ष्य के प्रतिग्रहण और संदाय