NI Act धारा 111: आदरणार्थ प्रतिगृहीता का दायित्व

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 11: आदरणार्थ प्रतिग्रहण और संदाय के विषय में तथा आवश्यकता की दशा में निर्देशन के विषय में

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111. आदरणार्थ प्रतिगृहीता का दायित्व—आदरणार्थ प्रतिगृहीता उन सब पक्षकारों के प्रति, जो उस पक्षकार के पश्चात्वर्ती हैं जिसके आदरणार्थ उसने उसे प्रतिगृहीत किया है, अपने को इस बात के लिए आबद्ध करता है कि यदि ऊपरवाल विनिमय-पत्र की रकम का संदाय न करे तो वह उसका संदाय करेगा, और ऐसा पक्षकार और उससे पूर्विक सब पक्षकार उसे उस सब हानि या नुकसान के लिए, जो आदरणार्थ प्रतिगृहीता ने वैसे प्रतिग्रहण के परिणामस्वरूप उठाया है अपनी क्रमिक हैसियतों में प्रतिकर देने के दायी हैं ।

किन्तु आदरणार्थ प्रतिगृहीता विनिमय-पत्र के धारक के प्रति तब के सिवाय दायी न होगा जबकि विनिमय-पत्र का उपस्थापन या उस दशा में, जिसमें कि प्रतिगृहीता ने विनिमय-पत्र पर जो पता दिया है वह स्थान उस स्थान से भिन्न है जहां कि विनिमय-पत्र देय होना रचित है विनिमय-पत्र का उपस्थापन के लिए अग्रेषण उसकी परिपक्वता के दिन के पश्चात् के अगले दिन से परवर्ती न होने वाले दिन कर दिया जाता है ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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