NI Act धारा 108: आदरणार्थ प्रतिग्रहण

परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 · अध्याय 11: आदरणार्थ प्रतिग्रहण और संदाय के विषय में तथा आवश्यकता की दशा में निर्देशन के विषय में

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108. आदरणार्थ प्रतिग्रहण—जबकि विनिमय-पत्र पर अप्रतिग्रहण या बेहतर प्रतिभूति के लिए टिप्पणित या प्रसाक्ष्यित कर दिया गया है तब ऐसा कोई भी व्यक्ति, जो उस पर पहले से दायी पक्षकार नहीं है, विनिमय-पत्र पर लेख द्वारा उसे धारक की सम्मति से उसके किसी भी पक्षकार के आदरणार्थ प्रतिगृहीत कर सकेगा *** ।

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आधिकारिक संदर्भ: India Code, भारत सरकार — आधिकारिक हिंदी PDF — स्रोत समीक्षा: 5 अक्टूबर 2026.दर्ज संस्करण / स्नैपशॉट की तारीख: 2026-10-05.आधिकारिक हिंदी PDF से Banaka का संदर्भ प्रतिलेख; प्रमाणित या अलग दिनांकित समेकित संस्करण नहीं। PDF के खराब कॉपी-पेस्ट अक्षर-मानचित्र को उसके फ़ॉन्ट और अक्षर-संयोजन से पुनर्प्राप्त किया गया है। पंक्ति-विन्यास, पादटिप्पणी संकेत और अलग संशोधन टिप्पणियाँ हटाई गई हैं; मूल शब्द, उदाहरण और प्रावधान सुरक्षित हैं। PDF के स्रोत-वर्तनी और विराम-चिह्न अनियमितताएँ बनी हैं। समीक्षा की तारीख संस्करण की तारीख नहीं है। धारा 2 और ऐतिहासिक अनुसूची निरसित हैं। मूल PDF और लागू न्यायिक व्याख्या साथ पढ़ें।मूल अनुसूची और संशोधन टिप्पणियाँ देखें

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