BNSS धारा 510: आरोप तय करने में चूक, या अनुपस्थिति, या त्रुटि का प्रभाव

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 · अध्याय 37: अनियमित कार्यवाही

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510. (1) सक्षम क्षेत्राधिकार वाले न्यायालय द्वारा कोई निष्कर्ष, सजा या आदेश केवल इस आधार पर अमान्य नहीं माना जाएगा कि कोई आरोप तय नहीं किया गया था या आरोप में किसी त्रुटि, चूक या अनियमितता के आधार पर, जिसमें आरोपों का कोई गलत संयोजन भी शामिल है। जब तक कि, अपील, पुष्टिकरण या पुनरीक्षण न्यायालय की राय में, वास्तव में न्याय की विफलता उत्पन्न न हुई हो।
(2) यदि अपील, पुष्टि या पुनरीक्षण न्यायालय की राय है कि वास्तव में न्याय की विफलता हुई है, तो यह हो सकता है,—
(ए) आरोप तय करने में चूक के मामले में, आदेश दिया जाए कि आरोप तय किया जाए, और आरोप तय होने के तुरंत बाद मुकदमे को फिर से शुरू किया जाए;
(बी) आरोप में किसी त्रुटि, चूक या अनियमितता के मामले में, जिस भी तरीके से वह उचित समझे, आरोप तय किए जाने पर नया मुकदमा चलाने का निर्देश देगा:
बशर्ते कि यदि न्यायालय की राय है कि मामले के तथ्य ऐसे हैं कि साबित किए गए तथ्यों के संबंध में अभियुक्त के खिलाफ कोई वैध आरोप नहीं लगाया जा सकता है, तो वह दोषसिद्धि को रद्द कर देगा।

यह संदर्भ के लिए अधिनियम का पाठ है, 1 जुलाई 2024 तक अद्यतन। यह कानूनी सलाह नहीं है; प्रामाणिक पाठ के लिए आधिकारिक राजपत्र देखें।

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